राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपरिशिष्ट ४०५ महारावत संग्रामसिंह ( रामसिंह ) वि० सं० ई० स० ( १७७५ ) ( १७१८ ) महारावत की गद्दीनशीनी । ( १७७६ ) ( १७१६ ) महारावत का देहांत । ——— महारावत उम्मेदसिंह ( १७७६ ) ( १७१६ ) महारावत की गद्दीनशीनी । ( १७७८ ) ( १७२१ ) महारावत का देहांत । ——— महारावत गोपालसिंह ( १७७८ ) ( १७२१ ) महारावत की गद्दीनशीनी । १७७८ १७२१ महारावत का उदयपुर जाना । ( १७७६ ) ( १७२२ ) महारावत को धरियावद का परगना मिलना । १७८७ १७३० महारावत का डूंगरपुर से महाराणा और पेशवा की सेना का घेरा उठवाना । १७६१ १७३४ परामर्श के लिए मरहटों की सेना के देवलिया के समीप एकत्रित न होने के लिए महाराणा जगतसिंह- ( दूसरा ) का बिहारीदास के नाम पत्र भेजना । १७६२ १७३६ पेशवा बाजीराव के राजपूताने में आने पर महा- रावत का उसके साथ रहना । १७६७ १७४० सवाई जयसिंह के जोधपुर घेरने पर महारावत का महाराणा के शामिल होना । १८१३ १७५६ महारावत का देहांत ।