भारतकोश
राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

पृष्ठ 477, कुल 534 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 477

४०६ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास महारावत सालिमसिंह वि० सं० ई० स० १८१३ १७५६ महारावत की गद्दीनशीनी । (१८१४) (१७५७) महारावत का दिल्ली जाकर बादशाह से राज्यचिन्ह, निशान एवं नक़्क़ारा रखने के सम्मान के साथ सालिमशाही सिक्का बनाने की आज्ञा प्राप्त करना । १८१८ १७६१ तुकोजी होल्कर का प्रतापगढ़ पर घेरा डालना । १८२० १७६३ मल्हारराव होल्कर का प्रतापगढ़ से धन वसूल करना । १८२५ १७६८ महारावत का महाराणा अरिसिंह की सहायतार्थ जाना । १८३१ १७७४ महारावत का देहांत । महारावत सामन्तसिंह १८३१ १७७४ महारावत की गद्दीनशीनी । १८४० १७८४ महाराणा भीमसिंह के बांसवाड़ा की तरफ़ बढ़ने का समाचार पाकर महारावत का मोतमिद भेज धरियावद का निरदावा करना । १८६१ १८०४ अंग्रेज़ सरकार के साथ संधि होना । १८६५ १८०८ महारावत के पौत्र केसरीसिंह और दलपतसिंह का जन्म । १८७५ १८१८ अंग्रेज़ सरकार के साथ पुनः संधि होना । १८७७ १८२० महारावत के पौत्र दलपतसिंह को डूंगरपुर के महारावत जसवन्तसिंह (दूसरा) का गोद लेने के लिए वहां ले जाना । १८८० १८२३ कुंवर दीपसिंह का बंदी होना !