राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपरिशिष्ट : ४०७ वि० सं० ई० स० १८८० १८२३ महारावत का अंग्रेज़ सरकार से सेना रखने के एवज़ में नक़द रक़म देने का इक़रार करना। (१८८०) (१८२३) भंवर केसरीसिंह को राजकार्य सौंपना। १८८३ १८२६ कुंवर दीपसिंह की मृत्यु। १८८६ १८३३ महारावत की पौत्री प्रतापकुंवरी का विवाह। १८६१ १८३४ केसरीसिंह की मृत्यु। (१८६१) (१८३४) महारावत का दलपतसिंह को राजकार्य सौंपना। १९०० १८४४ महारावत का देहांत। महारावत दलपतसिंह १९०० १८४४ महारावत की गद्दीनशीनी। (१९००) (१८४४) अंग्रेज़ सरकार की तरफ़ से महारावत को गद्दीनशीनी की ख़िलअत मिलना। १९०३ १८४६ डूंगरपुर की गद्दी पर साबली के ठाकुर जसवंतसिंह के पुत्र उदयसिंह को नियत करना। १९०५ १८४६ कुंवर उदयसिंह का जन्म। १९०६ १८५२ महारावत का डूंगरपुर का शासनाधिकार छोड़ना। १९१४ १८५७ सिपाही-विद्रोह के समय महारावत का नीमच में सेना भेजना और क़ासिमखां विलायती आदि विद्रोहियों का महारावत की सेना-द्वारा मारा जाना। १९१८ १८६२ महारावत को गोदनशीनी की सनद मिलना। १९२० १८६४ महारावत का परलोकवास।