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राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

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४०८ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास महारावत उदयसिंह वि० सं० ई० स० १६२० १८६४ महारावत की गद्दीनशीनी। १६२२ १८६५ महारावत के कुंवर हमीरसिंह का जन्म। १६२२ १८६५ अंग्रेज़ सरकार की तरफ़ से गद्दीनशीनी की खिलअत मिलना। १६२२ १८६५ प्रतापगढ़ राज्य की सीमा में होकर रेलवे लाइन लाने के विषय में अंग्रेज़ सरकार से बातचीत होना। १६२३ १८६६ महारावत का आगरे जाकर लॉर्ड लॉरेंस से मुलाक़ात करना। १६२४ १८६७ महारावत का प्रतापगढ़ को राजधानी बनाना। १६२४ १८६७ अंग्रेज़ सरकार की तरफ़ से पंद्रह तोपों की सलामी नियत होना। १६२५ १८६८ अकाल के समय लोगों की सहायता करना। १६२५ १८६८ अपराधियों के लेन-देन के संबंध में अंग्रेज़ सरकार के साथ इक़रारनामा होना। १६३२ १८७५ महारावत का लॉर्ड नॉर्थब्रुक की मुलाक़ात के लिए नीमच जाना। १६३३ १८७७ दिल्ली दरबार के समय महारावत को झंडा मिलना। १६३७ १८८१ प्रतापगढ़ में प्रथम बार मनुष्य-गणना होना। १६३६ १८८३ महारावत का नीमच जाकर इंदौर के तत्कालीन महाराजा तुकोजीराव होल्कर से मुलाक़ात करना। १६४३ १८८७ महारावत के कुंवर अर्जुनसिंह का जन्म। १६४४ १८८७ महाराणी विक्टोरिया की स्वर्ण जयंती पर महारावत का प्रतापगढ़ में पुल बनवाना। १६४४ १८८७ महारावत का नीमच जाकर शाहज़ादे ड्यूक ऑव् कनॉट से मुलाक़ात करना।