राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
DevanagariHindipublished534 पृष्ठ
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परिशिष्ट ४०६
वि० सं० ई० स०
१६४६ १८६० महारावत का देहांत।
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महारावत रघुनाथसिंह
१६४६ १८६० महारावत की गद्दीनशीनी।
१६४७ १८६० महारावत के ज्येष्ठ कुंवर प्रतापसिंह का देहांत।
१६४७ १८६१ अंग्रेज़ सरकार की तरफ़ से गद्दीनशीनी की खिलअत
और खरीता लेकर कर्नल ट्रेवर का प्रतापगढ़ जाना।
१६५१ १८६४ प्रतापगढ़ से मंदसोर जानेवाले मार्ग में महारावत का
पक्की सड़क बनवाना।
१६५१ १८६४ महारावत का प्रथम वर्ग के सरदारों को मुक़द्दमे
सुनने का अधिकार देना।
१६५२ १८६५ महारावत का प्रतापगढ़ में अस्पताल बनवाना।
१६५४ १८६७ महारावत की ज्येष्ठ राजकुमारी वल्लभकुंवरी का
विवाह बीकानेर के वर्तमान महाराजा सर गंगा-
सिंहजी से होना।
१६५६ १८६६ प्रतापगढ़ राज्य में भयङ्कर अकाल होना।
१६५७ १९०० महारावत के छोटे महाराजकुमार गोवर्द्धनसिंह का
जन्म।
१६५८ १९०१ महाराजकुमार गोवर्द्धनसिंह को अरणोद मिलना और
उसकी उपाधि "महाराज" होना।
१६५९ १९०३ महाराजकुमार मानसिंह का सीकर में विवाह होना।
१६६० १९०४ सालिमशाही सिक्के के स्थान में कल्दार का चलन
होना।
१६६१ १९०४ अंग्रेज़ सरकार के खिराज के कल्दार रुपये नियत
करना।
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