राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२० प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास दफ़्तर भी हैं, और उसके सामने मेहमानों के ठहरने के लिए 'अतिथि-गृह' ( Guest House ) बना हुआ है। नगर की स्वच्छता का प्रबन्ध म्यून्सि- सिपैलिटो-द्वारा होता है। यहां छापाखाना, बिजली घर, कॉटन प्रेस तथा जिनिंग फ़ैक्टरी भी हैं। यहां की दस्तकारी में हरे रंग के कांच पर सुनहरी मीनाकारी का काम प्रसिद्ध है। इस राज्य में सागवान की लकड़ी की बहु- तायत होने से मकानों आदि के बनाने में उसका प्रचुरता से इस्तेमाल होता है। प्रतापगढ़ से दक्षिण की तरफ़ पहाड़ी नाले में तालाब के पीछे दीपनाथ महादेव का मन्दिर है, जिसको महारावत सामन्तसिंह के कुंवर दीपसिंह ने बनवाया था। वहां का दृश्य मनोहर है। वहां और भी कई मन्दिर तथा देवकुलिकाएं हैं, जिनपर वृक्षों का सुन्दर झुरमुट है। कार्तिक सुदि १५ को प्रति वर्ष वहां मेला भरता है। उसके पास ही राजकीय श्मशान है, जहां महारावत उदयसिंह तथा महाराजकुमार मानसिंह की स्मारक छत्रियां हैं। ई० स० १६३१ ( वि० सं० १६८७ ) की मनुष्य-गणना के अनुसार प्रतापगढ़ क़सबे की जन संख्या १०८४५ है। जानागढ़—प्रतापगढ़ से लगभग १० मील दूर दक्षिण-पश्चिम के पहाड़ी प्रदेश में जानागढ़ नामक पुराना क़िला है, जिसमें एक मसजिद, हम्माम और अस्तवल बना हुआ है। ऐसी प्रसिद्धि है कि जानआलम नामक कोई मुसलमान शाहज़ादा यहां रहा था और उसने ही यह क़िला तथा अन्य स्थान बनवाये थे। यहां कोई शिलालेख न होने से यह कहना कठिन है कि यह क़िला कब बना और जानआलम कहां का था। इसके आस-पास भीलों और मीणों की थोड़ीसी वस्ती है। गौतमेश्वर के वि० सं० १५६२ आषाढ वदि १४ ( ई० स० १५०५ ता० १ जून ) के शिलालेख' से अनुमान होता है ( १ ) संवत् १५६२ वासठा विषे (वर्षे) आसा (षा) ढ वदि १४ वा...; ...पातसा (शा) ह श्रीनासीरसा (शा) हविजयराज्ये ...... श्रीषां (खां) नः आजम मकबेलषां (खां) न मुकतकले गयासगीर मुतालिक सा (शा) ह जोइ (जय) चंद दामा देवश्रीगौतमेसर मुगतो कराय्यो जे काइ कर लागतो