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राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

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२६ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास के सामने के कुंड में प्रपात के रूप में गिरता है । नीचे की तरफ बहुत गहराई में नदी बहती है । यहां का दृश्य बड़ा ही सुंदर है। प्रतिवर्ष वैशाख सुदि १५ को यहां बड़ा मेला लगता है और दूर-दूर से हज़ारों यात्री आकर मेले में सम्मिलित होते हैं। मंदिर के बाहर वि० सं० १५६२ आषाढ वदि १४ ( ई० स० १५०५ ता० १ जून) का शिलालेख है', जिससे पाया जाता है कि यह प्रदेश मांडू के सुलतान नासिरशाह के अधीन था और खानआलम मक़वलखां यहां का शासक था, जिसके समय में शाह, जैचंद ने यहां पर लगनेवाला यात्रियों का कर छुड़वाया । भचूंडला—प्रतापगढ़ से दक्षिण में लगभग १६ मील की दूरी पर भचूंडला नामक प्राचीन गांव है, जिसकी बस्ती अब कम रह गई है। उसके बाहर युद्ध में काम आनेवाले वीरों के स्मारक स्तम्भ खड़े हुए हैं, जिनमें से एक पर वि० सं० १३३८ ( ई० स० १२८१.) का लेख है । इन स्तंभों से थोड़ी ही दूर पर एक प्राचीन मंदिर है, जो सारा पत्थरों से बना है । इस मंदिर के द्वार पर गरुड़ारूढ़ विष्णु की मूर्ति और भीतर की दीवार के सहारे मूर्ति की वेदी बनी है । आज-कल इसमें शिव-लिङ्ग है, परन्तु यह पहले विष्णु का मंदिर था । इस मंदिर के बहुतसे पत्थरों की खुदाई तथा स्तम्भ आदि बेमेल हैं, जिससे अनुमान होता है कि किसी अन्य मंदिर के पत्थर इस मंदिर के बनाने में काम में लाये गये हों। जो भी हो यह मंदिर १४ वीं शताब्दी के आस-पास का बना हुआ प्रतीत होता है और इसके अधिकांश पत्थर शेवना से लाये गये जान पड़ते हैं । नीनोर— प्रतापगढ़ से दक्षिण में लगभग २४ मील की दूरी पर नीनोर नामक प्राचीन गांव है । यहां के दिगंबर जैन मंदिर के 'निजमंदिर का द्वार शेवना के शिव-मंदिर से लाकर खड़ा किया गया है। उसके मध्य में शिव और दोनों किनारों पर विष्णु और ब्रह्मा की मूर्तियां हैं । द्वार के दोनों पाश्र्वों में तीन-तीन स्त्री-पुरुषों की पास-पास खड़ी हुई मूर्तियां हैं । यहां का लक्ष्मीनारायण का मंदिर नागर ब्राह्मण गेमल और विश्वनाथ का ( १ ) देखो ऊपर पृ० २०, टिप्पण संख्या १ ।