रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)
Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१६६ रामायणमीमांसा पञ्चम इन गाथाओं में से केवल एक— "यथा फलानां पक्वानां नान्यत्र पतनाद् भयम्। एवं नरस्य जातस्य नान्यत्र मरणाद् भयम् ॥" गाथा रामायण से मिलती है। बुल्के का यह मत कि "जातक की गाथाएँ वाल्मीकिरामायण पर निर्भर नहीं हैं : इनका मूल स्रोत कोई प्राचीन आख्यान ही रहा होगा," ठीक नहीं है; क्योंकि यह प्रमाणसिद्ध है कि उप- निषदों में भी रामकथा मिलती है और वाल्मीकिरामायण ग्रन्थ तो राम के समकाल का ही है, अतः उपस्थित रामायण से भिन्न अन्य किन्हीं अप्रसिद्ध आख्यानों की कल्पना भी निराधार ही है। डा० याकोबी का यह अनुमान ठीक है कि "प्रस्तुत गाथा का मूल स्रोत कोई काव्य रहा होगा और बहुत सम्भव है कि वह वाल्मीकिरामायण ही हो।" बुल्के का यह कथन कि "बौद्ध-साहित्य से भिन्न ब्राह्मण-धर्म के वातावरण में निर्मित रामसम्बन्धी प्राचीन गीतों में इसका मूल स्रोत खोजा जाना चाहिये," अत्यन्त विचित्र ही है। ब्राह्मण-धर्म के प्रसिद्ध ग्रन्थ रामायण, महाभारत, पुराण, संहिता आदि को इन बौद्ध कथाओं का आधार न मान कर किन्हीं अज्ञात, अप्रसिद्ध एवं अप्रामा- णिक गीतों में उनका आधार ढूंढ़ना कहाँ तक युक्ति-युक्त होगा, यह विचारणीय है। कुछ लेखक रामराज्य की तुलना करते हुए रामायण एवं बौद्ध रामकथा का सम्बन्ध जोड़ते हैं। रामराज्य का काल गाथा १३ में निम्नोक्त है— "दस वस्ससहस्सानि सट्ठि वस्ससतानि च। कंबुगीव महावाहु रामो रज्जमकारयि ॥" "कम्बुग्रीव महाबाहु राम ने सोलह सहस्र वर्ष तक राज्य किया। वाल्मीकिरामायण, महाभारत और हरिवंश तीनों में इस गाथा का संस्कृत रूप पाया जाता है। रामायण में— "दशवर्षसहस्राणि दश वर्षशतानि च। भ्रातृभिः सहितः श्रीमान् रामो राज्यमकारयत् ॥" (वा० रा० ६।१३१।१०६) श्रीराम ने भ्राताओं के साथ ग्यारह हजार वर्ष राज्य किया। "दशवर्षसहस्राणि दशवर्ष शतानि च। रामो राज्यमुपासित्वा ब्रह्मलोकं प्रयास्यति ॥" (बा० रा० १।१।९७ अन्य पाठ) ग्यारह हजार वर्ष तक राज्य करके राम ब्रह्म (परब्रह्म) लोक में जायेंगे। महाभारत में— "दशवर्षसहस्राणि दशवर्षशतानि च। राज्यं कारितवान् रामस्ततः स्वभवनं गतः ॥" ( ३।१४८।१९ ) "श्यामो युवा लोहिताक्षो मातङ्ग इव यूथपः। आजानुबाहुः सुमुखः सिंहस्कन्धो महाभुजः ॥ दशवर्षसहस्राणि दशवर्षशतानि च। अयोध्याधिपतिर्भूत्वा रामो राज्यमकारयत् ।। (म० भा० १२।२९।६०, ६१ )