रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)
Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ३६ ) प्रस्तुत प्रस्तावना में जो कुछ लिखा गया है वह सब पूज्यपाद स्वामीजी द्वारा लिखित इस पुस्तक का प्रसाद है, जैसे गङ्गाजल के द्वारा ही भगवती गङ्गाजी की पूजा अर्चना होती है वैसे ही 'रामायण-मीमांसा' से संकलित कुछ अंशों को पाठकों के समक्ष प्रस्तावना के रूप में रखकर भगवान् राम के आदर्श से अनुप्राणित होनेवाले भक्तों के लिये पवित्र प्रयास किया गया है जिससे पाठक इस महान् ग्रन्थ की विषयवस्तु संक्षेप में अवगत कर सकें । इस ग्रन्थ के प्रकाशन में कुछ संस्थाओं एवं कुछ महानुभावों का जो योगदान हुआ है उसे हम भूल नहीं सकते । कलकत्ते की श्रीभक्तिसुधापरिषद् तथा आदरणीय श्री मोहनलालजी जालान का आर्थिक सहयोग विशेष उल्लेखनीय हैं । आदरणीय पं० श्री श्रीकृष्णपन्तजी शास्त्री साहित्याचार्य के अनवरत परिश्रम से ही ग्रन्थ का साङ्गोपाङ्ग सम्पादन भलीभांति सम्पन्न हो सका है । अतः ये सभी महानुभाव धन्यवाद के पात्र हैं । अन्त में रामायण-जगत् के माने जाने आधुनिक विद्वान् जो वेद-शास्त्रों द्वारा प्रतिपादित सनातन सिद्धान्तों से विपरीत बातें जाने या अनजाने में अपनी लेखनी द्वारा भगवान् राम की कथा के प्रसङ्ग में प्रस्तुत करते हैं, उनके प्रति भी मैं अपना आभार प्रदर्शित किये बिना नहीं रह सकता जिनके कारण ही अनन्तश्री स्वामी करपात्रीजी महाराज द्वारा मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान् राम के चरित का विशद विवेचन 'रामायण-मीमांसा' के रूप में जनता- जनार्दन को प्राप्त हो सका है । रामायण के सम्बन्ध में अब तक जो भी शंकाएँ और समालोचनाएँ प्राप्त हो सकी हैं, उन सबका समाधान वेद-शास्त्रादि सिद्धान्तों के आधार पर आप इस ग्रन्थ से प्राप्त कर सकेंगे । अन्त में हम परमसुहृद अकारण दयालु भगवान् राम के चरणकमलों में नत-मस्तक होकर विनम्र प्रार्थना करते हैं कि कलिकाल में प्रसूत हम सभी प्राणियों को वे ऐसी सद्बुद्धि प्रदान करें कि जिससे अपने युगल सीता-राम के चरणों में हमारी भक्ति और प्रीति दिनानुदिन बढ़ती रहे । श्याम सुन्दर धानुका