रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)
Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविषय-सूची प्रथम अध्याय परम ब्रह्मस्वरूप सीता-राम का वेदमूलक लोकोत्तर माहात्म्य १-१४ श्रीसीताराम का अनुपम ऐश्वर्य १ श्रीसीता प्रेमसार-सर्वस्व श्रीराम की सौन्दर्यसार-सर्वस्व १ श्रीसीता श्रीराम की महाशक्ति एवं सर्वस्व १ सङ्गम और विरह में से विरह में ही प्रियतम की रोम-रोम में अनुभूति २ अभिन्नरूप श्रीसीता और श्रीराम की सेवाशिक्षाप्रदानार्थ भिन्नरूपता ३ सर्वनियन्ता परमेश्वर का अस्तित्व अवश्य स्वीकार्य ४ अपौरुषेय वेद ही परमेश्वर का शाश्वत संविधान ४ वेदों का स्वतः प्रामाण्य ५ वेदावतार वाल्मीकिरामायण का अकुण्ठ प्रामाण्य ५ श्रीसीता-रामचरित की वेदमूलकता ६ वाल्मीकिरामायण में ही श्रीसीता-रामचरित का यथार्थ वर्णन ५ श्रीराम की महिमा के सम्बन्ध में महर्षि विश्वामित्र की उक्ति ८ महातेजा गौतम द्वारा अहल्या के साथ राम का पूजन ८ भगवान् परशुराम द्वारा त्रैलोक्यनाथ राम का स्तवन ८ महर्षि वसिष्ठ की सदुक्ति-लोक में ऐसी वस्तु का अस्तित्व ही नहीं जो राम के अनुव्रत न हो ९ पौरजनोक्ति—श्रीराम का अनुगमन कर रही सीता धन्या, कृतकृत्या ९ राम सूर्य के भी सूर्य, अग्नि के भी अग्नि, प्रभु के प्रभु इत्यादि सुमित्रा के वचन ९ अगस्त्यजी द्वारा राम का पूजन और आतिथ्यसत्कार ९ महर्षियों, सिद्धों, देवताओं एवं गन्धर्वों की राम के प्रति शुभाशंसा ९ मारीच राक्षस द्वारा राम का मूर्तिमान धर्म, सत्यपराक्रम एवं सकललोकाधीश्वर के रूप में वर्णन १० अजेय श्रीराम के सम्बन्ध में रावण-प्रणिधि अकम्पन की ईश्वरोक्ति १० तारा की दृष्टि में राम साधुओं के निवास, आपदग्रस्तों के परम आश्रय, आर्तों के एकमात्र संश्रय एवं यश के महान् भाजन १० हनुमान् के अनुसार राम त्रिमूर्ति १० सूर्य से उसकी प्रभावत् सीता राम से अभिन्न १० रावण के गुप्तचर का राम की विष्णुरूपता कथन १२ यम, कुबेर, महेन्द्र, वरुण आदि द्वारा राम का विष्णुरूप में स्तवन १२