रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)
Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २ ) द्वितीय अध्याय श्रीकामिल बुल्के की रामकथा १५-४८ वेद में राम के पूर्वजों का उल्लेख १५ वैदिक साहित्य में सीता १७ निर्विशेषण सीता और राम २९ स्यागरचर्चा २९ वेदों में सूत्रभूत वस्तुएँ ३० रामचन्द्रादि नामों की अनादिता ३० क्या देवता काल्पनिक हैं ? ३१ प्रामाण्य तथा अप्रामाण्य की चर्चा ३२ शब्दार्थ-सम्बन्ध की अनादि परम्परा ३३ मीमांसकों का ज्ञानप्रामाण्य ३४ वेदमन्त्रों का स्वरूप निर्धारण ३४ मतभेद, असमन्वय और कालभेद ३५ सीता के नामों की गणना ३५ उत्तरोत्तर विकास का सिद्धान्त निस्सार ३५ रामायणीय राम और वैदिक राम ३६ पदार्थ-निर्णय में वाक्यशेषों का महत्त्व ३६ वैदिक साहित्य में रामकथा की सामग्री ३६ पाठसम्बन्धी विवेचना ४२ महाभारत प्रथम या रामायण प्रथम ४५ असभ्यता, एकपत्नीव्रत और विकासवाद ४५ उत्तरकाण्ड की अर्वाचीनता ४६ वैदिक दशरथ बनाम रामायणीय दशरथ ४६ तृतीय अध्याय पाठ-भेदादि समीक्षा तथा ऐतिहासिक वृत्त ४९-८२ पाश्चात्यों का रोग—उनकी दृष्टि में ईसा के पूर्व सभ्यताविकास असम्भव ५० कुश और लव को गणिकाध्यक्ष कहना हृदयकालुष्यद्योतन ६१ वाल्मीकि ही भार्गव ६२ दस्यु वाल्मीकि ६३ पौर्वा-पर्यविरोध का समाधान ६७ महाभारत और रामायण ६७ भारत और महाभारत की कल्पना निर्मूल ६८ प्राचेतस मुनि ही वाल्मीकि ७१