रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)
Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ३ ) आर्षज्ञानसम्पन्न वाल्मीकि की व्याकरणज्ञता अनुपपन्न नहीं ७४ वाल्मीकि के पूर्वजन्म की ( वल्मीक से उत्पत्ति के पूर्व की ) विभिन्न कथाओं का समन्वय ७४ वाल्मीकि का अभिधान समझाने के लिये पौराणिकों ने उनके सम्बन्ध में विविध कथाएँ गढ़ लीं, यह कथन निराधार ७७ यह कल्पना वेद, पुराण, महाभारत आदि के सर्वथा विरुद्ध ७८ अतीत घटनाओं के विषय में प्रामाणिक इतिवृत्त ही प्रमाण, अटकलबाजी विपरीत दिशा की प्रापक ७८ वाल्मीकि, वसिष्ठ, पराशर, व्यास आदि महर्षियों के ग्रन्थों में अप्रामाण्य की कल्पना निराधार ७८ महाभारत जिस विषय में मौन हो उसमें स्कन्दपुराणादि की बात स्वीकारने में कोई दोष नहीं कभी का दस्यु कालान्तर में महर्षि भी हो सकता है ७९ वाल्मीकि वैदिक काल के राम के समकालिक होते तो उन्हें वैदिक भाषा में ही अपनी रचना करनी चाहिये थी, यह कथन निस्सार है, क्योंकि वैदिक काल कोई खास काल नहीं ८१ वैदिक काल में संस्कृत भाषा और उससे भिन्न मानुषी भाषा की सत्ता में प्रमाण ८१ चतुर्थ अध्याय वाल्मीकिरामायण और महाभारतरामोपाख्यान ८३-९८ महाभारत-रामोपाख्यान रामायण का स्रोत नहीं रामायण ही रामोपाख्यान का स्रोत ८४ महाभारत का रामोपाख्यान ८५ रामोपाख्यान में सीता की अलौकिकता का वर्णन ८५ पुलस्त्य-वंश वर्णन ८५ रावण के उत्पात से त्रस्त देवताओं का ब्रह्मा से निवेदन ८६ ब्रह्मा की प्रार्थना से महाराज दशरथ के यहाँ भगवान् विष्णु का राम रूप में अवतार ८६ भगवान् राम के असाधारण सर्वलोकरञ्जक विशिष्ट गुण ८६ राज्याभिषेक की तैयारी करने पर रानी कैकेयी द्वारा विघ्न उपस्थित करने से राम का पिता की सत्यरक्षा के लिये वनगमन ८६ राम-वनगमन से प्रिय पुत्र के वियोग के कारण दुःखित राजा का देहान्त ८६ भरत द्वारा माता की भर्त्सना कर श्रीराम को लौटालाने के लिए सपरिकर राम के निकट वन गमन ८७ राम का प्रेमपूर्वक समझाबुझा कर भरत को लौटा देना ८७ श्रीराम का पुनः पौरों के आगमन की शङ्का से गोदावरी तट पर गमन ८७ शूर्पणखा के कारण खर से महान् वैर ८७ धर्मवत्सल राम द्वारा राक्षसों का वधकर दण्डकारण्य को धर्मारण्य बना देना ८७ विकृतानना शूर्पणखा का लङ्का जाकर भ्राता रावण के चरणों में मूच्छित हो गिर पड़ना ८७ क्रोधमूच्छित रावण का शुष्करुधिरानना शूर्पणखा से विकृतकारी के विषय में प्रश्न ८७ शूर्पणखा का रामविक्रम और खरदूषण सहित राक्षसों का पराभव बतलाना ८७ रावण का मारीच के निकट गमन, मारीच का रावण के आगमन का उद्देश्य जानकर उसे विरत करने का प्रयत्न ८७ रावण के हठ पर कनकमृग बनकर सीता के निकट जाना ८७