भारतकोश
रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished1,049 पृष्ठ

पृष्ठ 413, कुल 1049 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 413

३३६ रामायणमीमांसा द्वादश श्रीराम (डब्ल्यू० ई० मैक्सवेल द्वारा संपादित) में हनुमान् के जन्म से लेकर लङ्का में रामविजय तक की कथा सेरीराम के आधार पर दी गयी है। (ग्रा) जावा की अर्वाचीन राम-कथा हिकायत सेरीराम राम केलिङ्ग में भी मलयन सेरीराम से कोई महत्वपूर्ण विभिन्नता नहीं मिलती। सेरीराम की प्राचीन- तम लिपि १६३३ ई० की मिलती है। हिकायत सेरीराम ३२० वां अनु० : इसमें रावण-चरित से लेकर सीता-त्याग के बाद राम-सीता-मिलन तक की कथा वर्णित है। उसकी विशेषताएँ निम्नोक्त हैं। (१) रावण चरित—दुराचार के कारण रावण अपने पिता के द्वारा निर्वासित किया जाता है। सिंहलद्वीप पहुँच कर रावण तप करता है और अल्लाह से चार लोकों का अधिकार प्राप्त करता है। प्रत्येक लोक की किसी राजकुमारी से विवाह करता है। अनेकों पुत्र उत्पन्न करता है जो बाद में राजा बन जाते हैं। इन्द्रजित् देवलोक का राजा, महरायन (महिरावण) पाताल का राजा एवं गङ्गामहासूरी नागलोक का राजा। इसके बाद रावण पृथ्वी पर लौट कर लङ्कापुरी बसाता है। अपने भाइयों कुम्भकर्ण, विभीषण, शूर्पणखा के पति वर्गासींगा को क्रमशः सेनापति, ज्योतिषी तथा प्रधान गुप्तचर बनाता है। (२) राम का जन्म—दशरथ का मन्दूदारी तथा बलियादारी के साथ विवाहवर्णन के बाद उनके पुत्रेष्टियज्ञ का उल्लेख है जिसमें एक काक बलियादारी का पायस चुरा कर उसे लङ्का ले जाता है। अनन्तर अन्य मुनि के पुत्र का वध, राम, लक्ष्मण, वर्दन और चित्रदन चार पुत्रों तथा कीकवी नामक पुत्री का जन्म वर्णित है। (३) सीता का जन्म और विवाह—मन्दूदारी के सौन्दर्य का वर्णन सुनकर रावण उसे दशरथ से मांगता है तथा एक माया मन्दूदारी को लङ्का ले जाता है जिसके गर्भ से सीता उत्पन्न होती है। अशुभ जन्मपत्र के कारण सीता समुद्र में फेंक दी जाती हैं तथा महारेसि (महर्षि) कली द्वारा पाली जाती है। यहाँ सीता के स्वयंवर में रावण और अन्य राजाओं के असफल प्रयत्नों के पश्चात् राम परीक्षा में सफल होकर सीता से विवाह करते हैं। विश्वामित्र का आगमन और परशुराम-तेजोभङ्ग के वृत्तान्त भी दिये गये हैं। (४) राम का वनवास—बलियादारी के अनुरोध से दशरथ उसके पुत्र वर्दन को राज्य देने का निश्चय करते हैं। राजा के सोते समय बलियादारी राम को बुलाकर राजा के निर्णय का समाचार सुनाती है। सुनकर राम प्रसन्न होकर ऋषि बनने के लिए सीता और लक्ष्मण के साथ वन को प्रस्थान करते हैं। वन में पहुँच कर और कुटी बनाकर राम कुश-घास से सात लड़कियों तथा पाँच लड़कों की सृष्टि करते हैं। ये नौकर बन कर घर का काम करते हैं जिससे राम, लक्ष्मण और सीता निश्चिन्त होकर साधना कर सकते हैं। रावण द्वारा शूर्पणखा के पति बर्गासींगा के वध के बाद उसका पुत्र दर्सासींगा अलौकिक खङ्ग सिद्ध करने के लिए तपस्या करने जाता है। अनन्तर वालि-सुग्रीव-युद्ध और अङ्गद (मन्दोदरी के पुत्र) का जन्म वर्णित है। इसके बाद अञ्जनी और वालि-सुग्रीव की उत्पत्ति (तीनों गौतम की पत्नी की संतान हैं) तथा हनुमान् के जन्म का वर्णन किया है। इसके अनुसार हनुमान् राम के वीर्य से उत्पन्न हुए हैं। (५) सीता का हरण और खोज—किसी दिन लक्ष्मण तप करते हुए शूर्पणखा के पुत्र दर्सासींगा का संयोग से वध कर देते हैं। बाद में शूर्पणखा अपने पुत्र से मिलने आती है, लक्ष्मण द्वारा विरूपित होकर अपने