भारतकोश
रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

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( ११ ) काशीकेदारमाहात्म्य का कथन है कि वेद, आगम, पुराण, इतिहास आदि सभी अनादि एवं भगवान् के श्वासस्वरूप हैं, वे कभी मलिन और कभी विशद हो भगवान् की प्रपञ्चलीला का वर्णन करते हैं २८३ योगवासिष्ठ वाल्मीकिकृत होने से वाल्मीकिकालिक ही २८४ अध्यात्मरामायण व्यासकृत होने से ई० सन् से ३५०० वर्ष पूर्व का २८५ अद्भुतरामायण अति प्राचीन है, अर्वाचीन नहीं २८६ आनन्दरामायण की रचना का काल १५वीं शती कदापि नहीं, रामचरित वर्णन में पर्यवसित यह शतकोटिप्रविस्तर रामायण का ही अङ्ग एवं प्रामाणिक है २८६ नवम अध्याय महाकवि कालिदास द्वारा रघुवंशी राजाओं के स्वभाव और महत्त्व का वर्णन २८८-३११ सम्राट् दिलीप की गोसेवा का वर्णन २९० नीति, प्रीति और परमार्थ के रहस्यज्ञ श्रीराम २९२ रावण गृहोषिता सीता के परिग्रह में कतिपय जनों की ही विप्रतिपत्ति २९२ सीतात्याग २९३ सीता के अनुपम उज्ज्वल चरित एवं पातिव्रत्य का प्रभाव २९६ राम द्वारा त्यागने पर भी पतिव्रता सीता की राम के प्रति अतीव उच्च धारणा २९७ रघुवंश के अनुसार रघुवंशी राजाओं की नीतिमत्ता २९९ तत्त्वसंग्रहरामायण आदि की प्राचीनता ३०३ कालनिर्णयरामायण की प्राचीनता ३०४ रामायण का वेदावतारत्व आदि महत्त्व ३०५ जैमिनिभारत की प्राचीनता ३०६ सत्योपाख्यान अर्वाचीन नहीं ३०७ धर्मखण्ड स्कन्दपुराण का अंश होने से व्यास कृति मानना ही उचित ३०८ हनुमत्संहिता की कथावस्तु शुद्ध वैदिक सिद्धान्तों पर आधारित ३०९ बृहत्कोशलखण्ड में वर्णित कथावस्तु को कृष्णलीला का अनुकरण कहना निराधार ३०९ हिन्दुत्व में वर्णित रामायणों में रामकथा ३१० दशम अध्याय संस्कृत ललितसाहित्य में वर्णित रामकथा ३१२-३२२ महाकाव्यों में निरूपित रामचरित ३१२ नाटकों में वर्णित रामकथाएँ ३१३ स्फुट काव्यों में वर्णित रामकथा ३२० कथासाहित्य में विस्तृत रामकथा के वर्णन का अभाव ३२१ चम्पूरामायण आदि चम्पूकाव्यों में रामकथा का वर्णन ३२२