रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)
Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअध्याय अयोध्याकाण्ड ४६३ कुछ लोग यह शङ्का करते हैं कि बुद्ध तो राम से अर्वाचीन थे, फिर राम बुद्ध की चर्चा कैसे कर सकते थे ? परन्तु यह शङ्का भी निर्मूल है, क्योंकि "असद्वा इदमग्र आसीत्" ( तै० उ० २।७ ) इत्यादि श्रुतियों में ही शून्यवाद आदि बौद्धवाद अनादिकाल से ही पूर्वपक्ष के रूप में प्रचलित है। बौद्धों के अनुसार भी लङ्कावतारसूत्र में अमिताभ आदि अनेक नामवाले बुद्ध गौतम बुद्ध से पहले भी हो चुके हैं। लङ्कावतारसूत्र में बुद्ध को लङ्कापति रावण का उपदेष्टा गुरु कहा गया है, अतः बुद्धमतानुयायी बुद्ध का निराकरण करना अत्यन्त सम्भव है। इसी तरह याकोबी का राम के अत्रि के आश्रम में जाने के वृत्तान्त को ( वाल्मीकिरामायण २।११७।५ से काण्ड के अन्त तक को ) प्रक्षिप्त मानना भी निराधार है। प्रामाणिक रामायण में बालकाण्ड की घटनाओं का निर्देश नहीं मिलता, लेकिन सीता-अनसूया-संवाद के अन्तर्गत लक्ष्मण और उर्मिला के विवाह का उल्लेख किया गया है। अरण्यकाण्ड में लक्ष्मण को अविवाहित कहा गया है, इस अंश में अयोनि