रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)
Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१८८ रामायणमीमांसा अष्टादश हनुमान् पाताल पहुँच कर किसी वृद्धा से राम और लक्ष्मण का वृत्तान्त जानकर मक्षिका-रूप धारण कर महल में जाकर राम और लक्ष्मण को प्रणाम करते हैं। बाद में हनुमान् महामाया-मन्दिर में देवी को राम का समाचार सुनाते हैं। देवी राम और शिव की अभिन्नता का उल्लेख करती हुई महीरावण के वध का उपाय बताती है कि जब राम और लक्ष्मण देवी के सामने उपस्थित किये जायें तो उनको महीरावण से कहना चाहिए कि हम साष्टाङ्ग प्रणाम करना नहीं जानते, हमें करके बतलाइये । जब वह साष्टाङ्ग प्रणाम करे तब उसी समय उसे मार डालना चाहिये । देवी के इस निर्देश के अनुसार ही हनुमान् ने महीरावण का वध कर दिया । बाद में महीरावण की पत्नी भी युद्ध में आती है। हनुमान् के पादप्रहार से उसके गर्भ से चार सिरवाले अहिरावण का जन्म हुआ । उसने तुरन्त हनुमान् का मुकाबला किया तथा हनुमान् के हाथ मारा गया । सेरीराम के अनुसार रावण का पुत्र पातालमहरायन हनुमान् का रूप धारण कर वानर-सेना में प्रवेश कर जाता है और राम को मायालेप से निद्रामग्न कर अपने घर ले जाता है। हनुमान् राम की खोज में पाताल जाकर एक राजकुमारी से भेंट करते हैं। जो अपने पुत्र के स्नान के लिए जल ले जानेवाली थी । ज्योतिषियों ने कहा था कि उसका पुत्र पाताल महरायन का उत्तराधिकारी होगा, अतः महरायन ने उसे राम के साथ ही मारने का निश्चय कर दिया था । हनुमान् उसे राजा बनाने की प्रतिज्ञा करते हैं । वह हनुमान् को छिपकली के रूप में अपने जलपात्र में छिपाकर किले के भीतर ले जाती है। फाटक पर हनुमान् अपने पुत्र तूगंग से द्वन्द्वयुद्ध कर उसकी सहायता अस्वीकार करते हैं। पाताल महरायन को हराकर सोये हुए राम को लड़का ले जाते हैं। राम तभी जागते हैं जब विभीषण उनके चेहरे पर के मायालेप को धो डालते हैं । अगले दिन राम रणभूमि में ही पातालमहरायन का वध करते हैं । सेरीराम के शेलावेर पाठ के अनुसार पाताल महरायन पहले दो सेनापतियों को भेजता है । बाद में वह कीट का रूप धारण कर हनुमान् का शरीर पार कर जाता है तथा क्रमशः सुग्रीव, जाम्बवान् और विभीषण के वेश में वह सेना में घुसने का असफल प्रयास करता है। रात के पिछले पहर में वह राम को पद्मनाल के मार्ग से ले जाता है । हनुमान् की जिससे भेंट होती है वह राजकुमारी अमीर अरब ( महरायन ) की बहन है । वह रावण का मामा था जिसने भानजे को कैद कर रखा था । हनुमान् पक्षी का रूप धारण कर जलपात्र में छिप जाते हैं । अमीर अरब को मार कर भानजे को राजा बनाते हैं । रामकियेन के अनुसार मैयरब को सहमालिबन का पोता माना गया है । उसके गुरू सुमेध ने उसका जीव मक्खी के रूप में त्रिकूट पर्वत पर छिपाया था । वह मायाचूर्ण से वानरों को सुला देता है । राम को हनुमान् के मुख से निकालकर पाताल ले जाता है। हनुमान् वहाँ जाकर अपने पुत्र मच्छानु तथा बाद में बिरक्वन नामक मैयरब की बहन से भेंट करते हैं । बिरक्वन को आदेश मिला कि वह एक हण्डा जल से भर दे; उसमें उसका पुत्र उबाला जायगा । बिरक्वन हनुमान् को पद्मतन्तु के रूप में अपने दुपट्टे में छिपाकर ले जाती है । तथा मैयरब के वध की युक्ति बताती है । हनुमान् राम के साथ लौटने के पहले बिरक्वन के पुत्र वैयविक को राजा तथा मच्छानु को युवराज नियुक्त करते हैं । बुल्के इसी तरह की अनेक कथाओं का संकलन कर राम-कथा का परिवर्तन, परिवर्धन, विकास या कल्पना सिद्ध करना चाहते हैं। उनकी दृष्टि में प्रचलित वाल्मीकिरामायण भी परिवर्धित, विकसित तथा कल्पित कथाओं से पूर्ण है । उनकी तथाकथित आदिरामायण का कोई व्यावहारिक रूप उपलब्ध नहीं है । उनकी कल्पना ही उसका आधार है। इसी तरह कुछ लोगों की दृष्टि में उनकी आदिरामायण में भी बहुत अंश कल्पित कहे जा सकेंगे ।