भारतकोश
रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

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पृष्ठ 666

अध्याय युद्धकाण्ड ५८९ परिणामस्वरूप सम्पूर्ण रामायण के प्रति अनास्था और अविश्वास ही उत्पन्न होगा। यह सब ईसाइयत के प्रचार की भूमिका है। यही बुल्के का उद्देश्य है। वस्तुतः अनादि अपौरुषेय मन्त्र, ब्राह्मण और उपनिषद् रूप वेद परम प्रमाण हैं। वही रामकथा का मूल है। वाल्मीकिरामायण द्वारा उसी का उपबृंहण होता है। शतकोटिप्रविस्तर रामायण, पुराण आदि राम-कथा के भिन्न-भिन्न प्रस्थान हैं। कल्पभेद से उनमें कुछ विलक्षणताएँ भी होती हैं। अन्य अर्वाचीन भारतीय एवं अभारतीय रामायणों के वही स्रोत हैं। देश और काल के व्यवधान से उनमें वाल्मीकिरामायण के विरुद्ध विकृतियाँ भी आ गयी हैं। रामकियेन आदि का तो अधिकांश भाग वाल्मीकिरामायण पर ही निर्भर है। कुछ अंशों में विकृतियाँ भी हैं। राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान् आदि का आदर्श वैदिक धर्म की मर्यादाओं के अनुरूप ही है।