रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)
Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ३२ ) आस्तिकों की दृष्टि में महाभारत का अतिशयित महत्त्व ८८९ व्यासजी ने ६० लाख श्लोकों की दूसरी भारत-संहिता रची, जिसकी विभिन्न लोकों में विभिन्न लक्ष संख्या विभिन्न लोगों ने सुनायी ८९० वर्तमान समय में उपलभ्यमान लक्ष श्लोकात्मक ग्रन्थ ही महाभारत है। वही भारत या जयनामक इतिहास है और वह व्यासकृत ही है ८९० भारतीय संस्कृति में प्रत्यक्ष और अनुमान से अतिरिक्त आगम भी प्रमाणत्वेन मान्य ८९० वेद के उपबृंहणार्थ आर्षज्ञानसम्पन्न त्रिकालज्ञ विष्णु भगवान के अवतार व्यास द्वारा महाभारत विरचित ८९१ सर्वज्ञकल्प भगवान् व्यास द्वारा आर्ष विज्ञान से अतीत और अनागत का वर्णन ८९१ श्रीगणेशजी ने शर्त के साथ एक लक्षश्लोकात्मक महाभारत लिखा ८९२ तीन वर्षों के निरन्तर प्रयत्न से महाभारत की रचना हुई ८९२ लक्षश्लोकात्मक महाभारत विष्णु के अवतार सर्वज्ञ व्यास द्वारा विरचित, इस सम्बन्ध में विविध पुराण वचनों का उल्लेख ८९४ महाभारत का जयेतिहास नाम पड़ने का कारण ८९६ धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष, के उपदेश के साथ पूर्ववृत्तों का वर्णन ही इतिहास है ८९७ महाभारत-निर्माण का काल निर्णय ८९७ परिशिष्ट ( १ ) रामापासना ९०३ परिशिष्ट ( २ ) उद्धृत ग्रन्थों की अनुक्रमणिका ९५९