रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)
Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ३१ ) बेबर आदि का महाभारत में यवन शब्द देखकर महाभारत सिकन्दर के आगमन के बाद का कहना भ्रम है। यवन शब्द यूनानियों के अर्थ प्रयुक्त नहीं ८७५ महाभारत में प्राचीन पुरुषों का उल्लेख होने और आधुनिकों को उल्लेख न होने से महाभारत की प्राचीनता सिद्ध ८७६ भास के नाटक बालचरित में कृष्णलीलाओं तथा गोपियों का उल्लेख होने से भास के पूर्व महाभारत की कथाएँ प्रसिद्धि प्राप्त कर चुकी थीं, यह सिद्ध ८७६ बौधायनगृह्यसूत्र में विष्णुसहस्रनामस्तव का उल्लेख तथा 'पत्रं पुष्पं फलं तोयमम्' आदि गीता- श्लोक का उल्लेख होने से ईस्वी सन् से अति प्राचीन बौधायन गृह्यसूत्र से भी महाभारत प्राचीन ८७६ अन्तरङ्ग और बहिरङ्ग परीक्षणों से महाभारत ५००० वर्ष प्राचीन सिद्ध ८७६ महाराज जनमेजय केताम्रशासन पत्र से श्रीरामपूजा हजारों वर्षों से प्रचलित एवं भारत की हजारों वर्ष प्राचीनता सिद्ध बुद्ध के पश्चात् ईसा से पूर्व तीसरी शती में रामायण का निर्माण हुआ, यह पाश्चात्य कल्पना असङ्गत ८७७ चालुक्य वंशीय महाराज पुलकेशिन् द्वितीय के ऐहोल नामक पर्वतीय क्षेत्र में स्थित जैन मन्दिर में उत्कीर्ण शिलालेख से महाभारत-संग्राम का यही समय सिद्ध है। उसमें महाभारत युद्ध के ३७३५ वर्ष बीतने पर यह शिलालेख ५५६ शकाब्द में उत्कीर्ण हुआ लिखा है ८७८ पुराणों की मान्यता ८७८ बौद्धपरम्परा में बुद्धनिर्वाण के विषय में अनेक मतभेद ८८० वेदों में रामायणसम्बन्धी व्यक्तियों के उल्लेख ८८० भारतीय दृष्टिकोण से काल का पैमाना ८८१ सत्ययुग-काल का परिमाण ८८२ त्रेतायुग-काल का ,, ,, द्वापरयुग-काल काल का ,, ,, कलियुग-काल का ,, ,, ब्रह्मा का इस संवत् २०२९ तक का काल ८८३ रामायण के अनुसार समुद्र-मन्थन ११ करोड़ वर्ष पूर्व हुआ था ८८३ शकुन्तला के पुत्र भरत के नाम पर इस देश का नाम भारत। भागवत के अनुसार अजनाभ नाम से पहले प्रसिद्ध इस देश का ऋषभ-पुत्र भरत के नाम से भारत नाम हुआ। कल्पभेद से दोनों पक्ष सत्य ८८३ वृत्रवध होने के बाद सतयुग में तारकामय देवासुरसंग्राम हुआ, उसमें वृहस्पति देवताओं के सहायक थे, अतः वृहस्पति को ई० शती २-४ के मध्य मानना अत्यन्त असंगत ८८४ वैवस्वत मन्वन्तर की सन्धि में उत्पन्न बौधायन, आपस्तम्ब आदि प्राचीन भृगु, पुलस्त्य आदि सप्तर्षि त्रेतायुग में उत्पन्न उन्हें वेदमन्त्र बिना बुद्धि और प्रयत्न के अपने आप अनायास प्रस्फुरित ८८४ प्रथम त्रेता में अत्रिपुत्र सोम, सोमपुत्र बुध और बुधपुत्र पुरूरवा हुए ८८५ त्रेता में ही परशुराम का आविर्भाव हुआ ८८६ २४ वें त्रेता में पुरोहित वसिष्ठ के साथ दशरथ-पुत्र राम विष्णु के अवतार रावणवधार्थ होंगे ८८६ महाभारत केवल व्यास निर्मित ८८६ सुमन्तु, जैमिनी, वैशम्पायन, पैल, सूत्र, भाष्य, भारत और महाभारत धर्माचार्य हैं ८८८