रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)
Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
पृष्ठ 987, कुल 1049 में से
संदर्भ में पढ़ेंसंख्या १ रामोपासना ११३ ७. श्रीविश्वामित्रप्रियाय नमः नाभिं पूजयामि ८. श्रीपरमात्मने नमः हृदयं पूजयामि ९. श्रीश्रीकण्ठाय नमः कण्ठं पूजयामि १०. श्रीसर्वास्त्रधारिणे नमः बाहू पूजयामि ११. श्रीरघूद्वहाय नमः मुखं पूजयामि १२. श्रीपद्मनाभाय नमः जिह्वां पूजयामि १३. श्रीदामोदराय नमः दन्तान् पूजयामि १४. श्रीजलदवर्णाय नमः नासिकां पूजयामि १५. श्रीश्रुतिगोचराय नमः कर्णौ पूजयामि १६. श्रीपुण्डरीकाक्षाय नमः नेत्रे पूजयामि १७. श्रीसीतापतये नमः ललाटं पूजयामि १८. श्रीज्ञानगम्याय नमः शिरः पूजयामि १९. श्रीसर्वात्मने नमः सर्वाङ्गं पूजयामि १९. धूप— “वनस्पतिरसैर्दिव्यैर्गन्धाढ्यैः सुमनोहरैः । रामचन्द्र महीपाल धूपोऽयं प्रतिगृह्यताम् ॥” इस मन्त्र से भगवान् को दिव्य धूप अर्पण करना चाहिये । २०. दीप— “ज्योतिषां पतये तुभ्यं नमो रामाय वेधसे । गृहाण दीपकं राजन् त्रैलोक्यतिमिरापह ॥ इस मन्त्र से दीपक निवेदन करना चाहिये । २१. नैवेद्य—हाथ धोकर नैवेद्य समर्पण करना चाहिये । “इदं दिव्यान्रममृतं रसैः षड्भिः समन्वितम् । श्रीराम राम राजेन्द्र नैवेद्यं प्रतिगृह्यताम् ॥ कर्पूरवासितं तोयं सुवर्णकलशे स्थितम् । गृहाणाचमनं नाथ जानक्या सह राघव ॥” कर्पूरवासित जल सुवर्णकलश में रखकर जानकी के साथ श्रीराम को अर्पण करते हैं, इस मन्त्र से आचमन कराकर शालि का भात, दाल, हजारों प्रकार के शाक, दही, बड़ी, पकौड़ी, पूड़ी, मालपूआ, खीर, रबड़ी, हलुआ, जिलेबी, गुलाबजामुन, रसगुल्ला, पञ्चामृत, मक्खन, मिश्री आदि विविध प्रकार का नैवेद्य भगवान् श्रीराम को भोग लगाना चाहिये । २२. फल— “इदं फलं मया देव स्थापितं पुरतस्तव । तेन मे सुफलावाप्तिर्भवेज्जन्मनि जन्मनि ॥” इस मन्त्र से भगवान् श्रीराम के सम्मुख आम, जामुन, नारङ्ग, एरण्ड, कपित्थ, पनस, दाडिम, गान्धार- दाडिम, सेव, कदली आदि फल समर्पण कर सभी परिवार के सहित भगवान् श्रीराम भोजन कर रहे हैं ऐसी भावना करनी चाहिये । अन्त में 'अमृतापिधानमसि स्वाहा' से आपोशान कराकर हस्तप्रक्षालन, मुखप्रक्षालन आदि कराना चाहिये । हाथ की चिकनाई दूर करने के लिए चन्दन देना चाहिये । ११५