रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)
Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें९१२ रामायणमीमांसा परिशिष्ट १३. वस्त्र— "सन्तप्तकाञ्चनप्रख्यं पीताम्बरमिदं हरे। सङ्गृहाण जगन्नाथ रामचन्द्र नमोऽस्तु ते ॥" इस मन्त्र से तपाये हुए स्वर्ण के तुल्य दिव्य पीताम्बर आदि विविध वस्त्र सीतासहित राम को अर्पित करने चाहिये। १४. यज्ञोपवीत— "श्रीरामाच्युत यज्ञेश श्रीधरानन्त राघव । ब्रह्मसूत्रं सोत्तरीयं गृहाण रघुनायक ॥" इस मन्त्र से उत्तरीय (दुपट्टा) सहित यज्ञोपवीत अर्पित करना चाहिये । १५. नाना प्रकार के आभूषण—"किरीटहारकेयूररत्नकुण्डलमेखलाः । ग्रैवेयकौस्तुभोदाररत्नकङ्कणनूपुराः ॥ एवमादीनि सर्वाणि भूषणानि नृपोत्तम । अहं दास्यामि सद्भक्त्या सङ्गृहाण जनार्दन ॥" इस मन्त्र से दिव्यदम्पती श्रीसीताराम को किरीट, हार, केयूर, रत्नकुण्डल, मेखला, ग्रैवेयक, कौस्तुभ, सुन्दर रत्नकङ्कण, नूपुर आदि विविध आभूषण अर्पित करने चाहिये । १६. गन्ध— "प्रधानदेवनीयञ्च सर्वमाङ्गल्यकर्मणि । प्रगृह्यतां दीनबन्धो गन्धोऽयं मङ्गलप्रदः ॥" इस मन्त्र से कुङ्कुम-कर्पूरयुक्त दिव्यगन्ध (यक्षकर्दम आदि) अर्पित करना चाहिये । "कुङ्कुमागुरुकस्तूरीकर्पूरोन्मिश्रचन्दनम् । तुभ्यं दास्यामि विश्वेश श्रीराम स्वीकुरु प्रभो ॥" इस मन्त्र से दिव्य चन्दन अर्पण करना चाहिये । १७. पुष्पमाला तथा तुलसी—"तुलसीकुन्दमन्दारजातीपुन्नागचम्पकैः । कदम्बकरवीरैश्च कुसुमैः शतपत्रकैः ॥ नीलाम्बुजैर्बिल्वदलैः पुष्पमाल्यैश्च राघव । पूजयिष्याम्यहं भक्त्या सङ्गृहाण जनार्दन ॥" इस मन्त्र से तुलसी, कुन्द, मन्दार