रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)
Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसंख्या १ रामोपासना १११ ६. पाद्य— "त्रैलोक्यपावनानन्त नमस्ते रघुनायक। पाद्यं गृहाण राजर्षे नमो राजीवलोचन ॥" हे त्रैलोक्यपावन, हे अनन्त, हे रघुनायक, हे राजीवलोचन राजर्षे, आप पाद्य ( पाद प्रक्षालनार्थ जल ) ग्रहण करें । उक्त मन्त्र से दूर्वा, कमल, विष्णुक्रान्ता तथा विविध पुष्पों से युक्त जल श्रीराम के चरण में अर्पित करना चाहिये । ७, अर्घ्य— "परिपूर्णपरानन्द नमो रामाय वेधसे । गृहाणार्घ्यं मया दत्तं कृष्ण विष्णो जनार्दन ॥" हे परिपूर्णपरानन्द, सर्वोत्पादक श्रीरामरूप में आपको नमस्कार है । हे कृष्ण, हे विष्णो, आप मेरे द्वारा प्रदत्त अर्घ्य ग्रहण करें । उक्त मन्त्र से गन्ध, पुष्प, यव, सर्षप, दूर्वा, तिल, कुश, अक्षत के साथ रत्नमय स्वर्णपात्र में गङ्गादि का जल डालकर भगवान् के हस्तारविन्द में अर्घ्य प्रदान करना चाहिये । ८. आचमन— "राजराजेन्द्र देवेश शरणागतवत्सल । गृहाणाचमनं देव नित्यशुद्ध परात्पर ॥" हे देवेश, हे शरणागतवत्सल, हे नित्यशुद्ध आप आचमन स्वीकार करें । इस मन्त्र से जातीफल, कङ्कोल, लवङ्ग और गन्ध से युक्त अमृततुल्यजल जाचमन के लिए प्रदान करना चाहिये । ९. मधुपर्क "ॐ (श्री) नमो वासुदेवाय तत्त्वज्ञानस्वरूपिणे । मधुपर्कं गृहाणेमं राजराजाय ते नमः ॥" सत्यज्ञानस्वरूप हे राजन्, आप मधुपर्क ग्रहण करें, इस मन्त्र से रत्नपात्र में दधि, मधु और घृत रखकर रत्नमय पात्रान्तर से ढँककर मधुपर्क समर्पण करना चाहिये । फिर भगवान् से निम्नलिखित मन्त्र से प्रसन्न होने की प्रार्थना करनी चाहिये— "प्रसीद जानकीनाथ सुप्रसीद सुरेश्वर । प्रसन्नो भव मे राजन् प्रसन्नो मधुसूदन ॥" १०. मधुपर्काङ्ग आचमन— "नमः सत्याय शुद्धाय तत्त्वज्ञानस्वरूपिणे । गृहाणाचमनं नाथ सर्वलोकैकनायक ॥" सत्य, शुद्ध और तत्त्वज्ञान स्वरूप भगवान् श्रीराम को नमस्कार है, हे त्रैलोक्यनायक आप आचमन स्वीकार करें । इस मन्त्र से शुद्ध जल आचमन के लिए प्रदान करे । ११. स्नान— "ब्रह्माण्डोदरमध्यस्थैस्तीर्थैश्च रघुनन्दन । स्नपयिष्याम्यहं भक्त्या सङ्गृह्णाण जनार्दन ॥" इस मन्त्र से विविध तीर्थोदकों तथा गङ्गोदक से भगवान् श्रीराम को स्नान कराना चाहिये । १२. पञ्चामृतस्नान— "पञ्चामृतं समानीतं पयो दधि घृतं मधु । सशर्करं मया दत्तं श्रीराम प्रतिगृह्यताम् ॥" इस मन्त्र से भगवान् श्रीराम का दूध, दही, घी, मधु और शर्करा से पृथक् पृथक् स्नान कराकर इन पाँचों को सम्मिलित कर पञ्चामृत स्नान कराना चाहिये । उसके पश्चात् उष्णोदक से स्नान कराना चाहिये ।