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झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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१२० झांसी की रानी राजा समझ गए। कुछ पहले से मनमें जो बात उठी थी, उसको उन्होने कहा, 'मैं अभी जिऊँगा। प्रताप मिश्र का नया नगर देखने जाऊँगा परन्तु मैंने निश्चय किया है कि दत्तक ले लूँ।' मोरोपन्त और नरसिंहराव राजा के मुह की ओर देखने लगे। राजा कहते गये, 'हमारे कुटुम्बी वासुदेवराव नेवालकर का एक पुत्र आनन्दराव है। पाच वर्ष का है। सुन्दर और होनहार है। उसको मैं गोद लेना चाहता हू। यदि रानी साहब स्वीकार करे तो मै आज ही शास्त्रानुसार गोद ले लूं।' मोरोपन्त पूछ आये। रानी ने स्वीकार किया। तुरन्त दत्तक विधान की तैयारी की गई। नगर की जनता के मुखिया निमंत्रित किये गये। मेजर मालकम की जगह मेजर एलिस असिस्टेंट पोलिटिकल एजेंट होकर आ गया था और मालकम पोलिटिकल एजेंट होकर चला गया था, उसको तथा अङ्गरेजी सेना के अफसर कप्तान मार्टिन को भी बुलाया गया। इन सबके सामने राजा ने आनन्दराव को विधिवत् गोद लिया। ˇ आनन्दराव का नाम बदलकर दामोदरराव रक्खा गया।