झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)
Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography
वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंलक्ष्मीबाई ३१६ [ ६० ] झांसी के दक्षिण में सागर का जिला और सागर के दक्षिण पश्चिम में भोपाल रियासत । भोपाल रियासत में आमापानी नाम की गढी थी । थोडी दूर पर राहतगढ नाम का किला था । आमापानी के अधिकारी ने राहतगढ पर कब्जा कर लिया । राहतगढ में बहुत से पठान इकट्ठे हो गये । सागर की सेना ने विद्रोह किया और सागर को लूट लिया । जबलपुर में विप्लव हुआ । सारे विन्ध्यखण्ड में विप्लव की लपटें बढीं । सन् १८५८ के मध्य सितम्बर में जनरल सरह्यू रोज ससैन्य इगलैंड से बम्बई उतरा । विप्लवकारियो से बदला लेना और विप्लव का दमन करना उसका दृढ़ निश्चय था । उसी महीने में दिल्ली का पतन हुआ । बहादुरशाह कैद कर लिया गया और उसके दो शाहजादे मार डाले गये । लखनऊ का मुहासिरा समाप्त हुआ । कानपुर में तात्या टोपे ने अङ्गरेजो के कम से कम तीन जनरलो को लडाई में हराया । परन्तु दिल्ली के पतन का विप्लवकारियो पर बुरा प्रभाव पडा । लखनऊ के प्रथम पतन पर भी अवध में जनता ने युद्ध जारी रक्खा अङ्गरेज़ो ने इलाहाबाद फतेहपूर इत्यादि में प्रचण्ड हिंसा वृत्ति से प्रेरित होकर भीषण और वीभत्स क्रूर कृत्य किये । इनके समाचार झांसी में आये । बिठूर का पतन हुआ । नाना साहब कठिनाई से रात के समय अपनी पत्नियो और विमाता को नाव में बिठालाकर निकल पाये और लखनऊ की बेगम के पास पहुंच पाये । झांसी वालो के संसर्ग में फिर कभी नही आये । रावसाहब और तात्या टोपे अपनी सेना लेकर कालपी आ गये और यहाँ से युद्ध की योजनाये प्रयुक्त करने लगे । यह समाचार भी झांसी आया । झांसी में हार खाकर नत्थेखा टीकमगढ मे शान्ति के साथ नही बैठा, वरन झाँसी के पूर्वीय परगनो में डेढ दो महीने तक लूटमार करता