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झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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त्रस्त ( क्या सचमुच ? ) [ ६४ ] मदनपूर की लडाई जीतने के बाद रोज की सेना ने शाहगढ को अधिकार में किया । फिर मडावरा की गढी को कब्जे में करने के उपरान्त वानपूर राज्य को अङ्गरेजी राज्य में मिला लिया। वानपूर के महल के कुछ भाग को तोप से उडा दिया, बाकी को जला दिया और इन दोनो राज्यो के बडे कर्मचारियो को फासी पर चढा दिया । इन महलो में पुस्तको और चित्रो का भी सग्रह था, परन्तु विप्लवकारियो की सम्पत्ति होने के कारण वे अस्पृश्य हो गये थे । वध और अग्नि बरसाती हुई, रोज की सेना १२ मार्च सन् १८५८ को तालवेहट आ पहुँची । तालवेहट का प्राचीन दृढ किला लडाई के लिये उपयुक्त था, परन्तु उसमें विप्लवकारी बहुत थोडी सख्या में थे और उनका नायक कोई बडा आदमी न था । मुकाबले में रोज सरीखा चतुर और विजय प्राप्त सेनापति तथा अङ्गरेजो की विशाल सेना और तोपे - विप्ल- वकारी भाग गये और रोज ने तालवेहट का किला सहज ही अधिकार में कर लिया । चन्देरी में वानपूर के राजा का एक दस्ता था । रोज ने सोचा बग़ल के इस काटे को पहले निकाल डालना चाहिये । उसने चंदेरी पर