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झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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३३८ झाँसी की रानी हमला करने के लिये अपने एक अफसर ब्रिगेडियर स्टुअर्ट को भेजा । स्टुअर्ट ने बिना किसी कठिनाई के चंदेरी को पराजित कर दिया । झाँसी की पूर्वी तहसील मऊ में एक छोटा सा गढ था । इस गढ में रानी की ओर से काशीनाथ भैया और आनन्दराय इत्यादि छोटे छोटे जागीरदार तैयारी कर चुके थे । मऊ के दमन के लिये रोज ने बानपूर विध्वंस के बाद अपना एक दस्ता सीधा भेज दिया था । रोज ने झाँसी पर चढाई करने के पहले रानी लक्ष्मीबाई के पास सम्वाद भेजा । 'आप अपने दीवान लक्ष्मणराव, लाला भाऊबख्शी, मोरोपन्त ताम्बे ( आपके पिता ), नाना भोपटकर, दीवान जवाहरसिंह, दीवान रघुनाथसिंह, कुंवर खुदाबख्श और मोतीसाई के साथ निश्शस्त्र चली आवें अन्यथा कठोर और भयंकर फल के लिये तैयार रहे ।' इस प्रकार के संवाद के लिये रानी तैयारी थी, परन्तु जिस मोतीसाईं को जनरल रोज चाहते थे उसके स्मरण से रानी के दीवान खास में हंसी का तूफान खडा हो गया - 'नाना साहब,' रानी ने हंसी को रोक कर कहा, 'इस मोतीसाई को कहा से पकड़ बुलाऊँ ?' नाना भोरटकर ने कहा, 'सरकार के यहा यदि बनावट चलती होती और जाली सिक्के ढलते होते तो किसी न किसी को सांई का चोगा पहिना दिया जाता ।' मोतीबाई दीवान खास में मौजूद थी भुझलाई हुई सूरत बनाकर बोली, 'सरकार दूत को बुलाकर पूछा जाय कि मोतीसाई किस हुलिया का आदमी है ।' मोरोपन्त ने कहा, 'उसके लम्बी दाढी होगी, बडे बडे केश और टूनी आखें । सांइयो और साधुओ ने अङ्गरेजी फौज के भडकाने में ज्यादा भाग लिया है, इसलिये रोज़ को एक सांई भी चाहिये ।' दीवान लक्ष्मणराव गंभीर होकर बोला, 'सरकार उत्तर जल्दी भेज

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