भारतकोश
झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

पृष्ठ 41, कुल 526 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 41

३० झाँसी की रानी वाजीराव ने पूछा, 'क्या है तात्या ?' अपने नाम के एक और मनुष्य को सम्बोधित होते देखकर दीक्षित चौंका । मनू ने बेधडक कहा, 'यह हमारे गुरू के अखाडे के प्रधान हैं। आपके नामवारी ।' तात्या दीक्षित ने मन में चाहा कि लडकी और अधिक बात न करे । युवक तात्या ने पेशवा से विनय की, 'महाराज, गुरूजी ने कहलवाया हे कि झाँसी से जो आचार्य आये हैं वे हमारे अखाडे को देखने की कृपा करे ।' दीक्षित ने हामी भरी । तीसरे पहर सब लोग बाला गुरू के अखाडे पर गये । मलखम्ब और मल्लयुद्ध का प्रदर्शन हुआ ।