रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)
Rasaratna Samuchchaya Hindi
रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री) द्वारा
स्रोत: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंप्रथमोऽध्यायः । ३७
राइट ( Tetrahedrite ) सुवर्ण-रौप्यमाक्षिक, स्फटिक, एन्टिमनि, अयस्कान्त ( Pyrolusite ), सिलो मेलेन, ( Psilomelane ) आदि खनिज भी मिलते हैं । एक स्थान पर २७०० फुट और दूसरे स्थान पर १२०० फुट की बिस्तृत भूमि पर फैले हुए पारदीय खनिज पाये गये हैं । राइनलेन्ड ( Rhinland ) के ज़िले में ९० फ्लास्क पारद प्रतिवर्ष यशद खनिज के साथ निकलता है ।
हङ्गरी ( Hungary )
महायूद्ध के पूर्व हङ्गरी में वार्षिक ९० टन पारद निकलता था । अब उस के प्रान्त बदल गये हैं । हङ्गरी में एन्टिमनि के साथ पारदीय खनिज पाये जाते थे, जहां तक विदित हुआ है आज कल इस देश में पारद निकलने का व्यवसाय नहीं होता है ।
इटली ( Italy )
इटली में सर्वत्र पारदीय खनिज प्राप्त होते हैं । वहां पर कई एक पुरानी बड़ी बड़ी खानें हैं । पारदीय खानों का प्रबन्ध राजकीय तरफ से किया जाता है । इटली में पारद के मुख्य चार खनिज पाये जाते हैं ।
१—स्टील और दैस्ट्येन्डरफ ( Steel orestahlerz ) ।
इस में ७५ फीस दी पारद मिलता है।
२—लोवर ओर ( Liverore--Lebererz ) यकृदाकार हिङ्गुल या दरदः । यह मृत्तिका जाति का हिङ्गुल है। इस पर स्टेह लर्ज ( Stehlerz ) का कञ्चुक ( Kernels ) चढ़े रहते हैं ।
३—कोरे लाइन ( Coralline = corallenerz )
प्रवालाभ हिङ्गुल ( श्वेतेरेखः प्रवालाभः )
४—ब्रिक ( Brickore ) और गिरि सिन्दूर या रक्त हिङ्गुल ( जपाकुसुमसदृकाशः हंसपादो महोत्तमः ) यह पारदीय खनिजों के किनारे पाया जाता है । सम्भवतः इसी प्रकार के खनिजों को देखकर ऊपर के वाक्य प्राचीनों ने लिखे हैं । इटली के इड्रिया ( Idria ) नामक स्थान में सब से पुरानी पारद की बड़ी खाने हैं । इन खानों में एक स्थल पर फन्नेल (Funnel) की शक्ल के पाइप (नल या छिद्र) हैं । सम्भव है एसे ही कूपाकार छिद्र देख कर इस ग्रन्थ ( रसरत्न समुच्चय ) में 'जाताः कूपाश्च पञ्च च' वाक्य किसी महर्षि ने लिख दिये हों । इस विषय में मानो ग्राफ आफ मर्करी के पृष्ठ ४९ का निम्न लिखित अवतरण ध्यान में रखने योग्य है—
In the Immediately neighbouring rock are several funnel-shaped cavities also filled with metallif erous sands and Clays. The proportion of cinnabar mereasing with the depth.