रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)
Rasaratna Samuchchaya Hindi
रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री) द्वारा
स्रोत: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (उद्गम)
DevanagariHindipublished362 पृष्ठ
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रसरत्नसमुच्चयस्य मूलविषयानुक्रमणिका—
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| प्रथमोऽध्यायः । | अभ्रभेदाः | ६० | |
| मङ्गलाचरणम् | १ | पिनाकादीनां लक्षणानि | " |
| टीकाकारकृतमङ्गलाचरणं व्याख्या-प्रयोजनञ्च | " | वर्णभेदेनाभ्रकस्य भेदास्तेषां क्रियाविषयश्च | " |
| ग्रन्थकर्तॄणां नामानि | २ | ग्रासयोग्याभ्रम् | ६१ |
| हिमालयवर्णनम् | ३ | निश्चन्द्रसचन्द्राभ्रयोर्गुणदोषौ | " |
| महादेवस्थितिवर्णनम् | ४ | अशुद्धाभ्रस्य दोषाः | " |
| रसोत्कर्षवर्णनम् | ५ | अभ्रशोधनमारणे | ६२ |
| पारदस्य विशेषतो महत्ता | ६ | धान्याभ्रकम् | ६३ |
| मूर्च्छितादिपारदगुणाः | ७ | धान्याभ्रमारणम् | " |
| पारदे सर्वौषधाना मन्तर्भावः | ९ | अभ्रमारणम् | " |
| रसस्य जीवन्मुक्तिकारणता | १० | मतान्तर | " |
| रसोत्पत्तिवर्णनम् | १३ | अभ्रकसत्त्वपातनम् | ६४ |
| रसानां भेदाः | १४ | प्रकारान्तर | " |
| रसादीनां निरुक्तिः | १६ | किट्टात्सत्त्वग्रहणम् | ६५ |
| रससंस्कारकारणम् | १७ | सत्त्वशोधनम् | " |
| रसस्य स्थानान्तरगतिवर्णनम् | १८ | सत्त्वानां मृदुकरणम् | " |
| हिङ्गुलोत्पत्तिवर्णनम् | १९ | अभ्रमारणम् | ६६ |
| द्वितीयोऽध्यायः । | मारणे प्रकारान्तरम् | ६७ | |
| महारसाः | ५८ | सत्त्वस्यशोधनमारणे | " |
| गन्धाभ्रयोः स्वरूपम् | " | अभ्रप्रयोगः | ६८ |
| अभ्रकगुणाः | " | वैक्रान्तः | " |
| वैक्रान्तस्य वर्णभेदाः | " |
२ र० स०