रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)
Rasaratna Samuchchaya Hindi
रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री) द्वारा
स्रोत: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (उद्गम)
DevanagariHindipublished362 पृष्ठ
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| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्कः |
|---|---|---|---|
| वैक्रान्तस्य गुणाः | ६९ | विमलस्य मारणम् | ७८ |
| वैक्रान्तोत्पत्तिः | ,, | विमलस्य सत्त्वपातनविधिः | ,, |
| वैक्रान्तस्य स्थानं निरुक्तिश्च | ७० | मतान्तरेण सत्त्वपातनम् | ७९ |
| मतान्तरेण वर्णभेदकथनम् | ,, | विमलस्य प्रयोगविधिर्गुणाश्च | ,, |
| वर्णभेदेन कार्यभेदकथनम् | ,, | अथ शिलाजंतु | ८० |
| आहरणविधिः | ७१ | शिलाजतुभेदाः | ,, |
| गुणान्तरम् | ,, | शिलाजतुन उत्पत्तिः | ,, |
| शोधनम् | ,, | शुद्धशिलाजतुलक्षणम् | ८१ |
| मतान्तरे शोधनमारणे | ७० | गुणाः | ८२ |
| मतान्तरम् | ७१ | शोधनम् | ८३ |
| सत्त्वपातनम् | ७२ | शिलाजतुमारणम् | ,, |
| मतान्तरम् | ,, | प्रयोगविधिः | ,, |
| मृतवैक्रान्तस्य प्रयोगविधिर्गुणाश्च | ,, | सत्त्वपातनम् | ,, |
| प्रयोगान्तरम् | ७३ | कर्पूरशिलाजतुनो लक्षणादिकम् | ८४ |
| अथ माक्षिकम् | ,, | सस्यकः | ,, |
| माक्षिकोत्पत्तिवर्णनम् | ,, | सस्यकोत्पत्तिवर्णनम् | ,, |
| माक्षिकस्य गुणाः | ,, | प्रशस्तसस्यकलक्षणम् | ,, |
| माक्षिकभेदाः | ७४ | गुणाः | ८५ |
| माक्षिकगुणाः | ७५ | शोधनम् | ,, |
| सुवर्णमाक्षिकशोधनमारणे | ,, | मतान्तरम् | ,, |
| सत्त्वपातनम् | ,, | तुत्थखर्परमारणम् | ,, |
| विशुद्धताम्यसत्त्वलक्षणम् | ७६ | तुत्थसत्त्वपातनम् | ,, |
| सुवर्णमाक्षिकरसायनम् | ,, | मतान्तरम् | ८६ |
| सुवर्णमाक्षिकरसायनम् | ७७ | प्रयोगविधिः | ,, |
| विमलभेदाः | ,, | भालुकितन्त्रोक्तप्रयोग विधिः | ,, |
| विमलस्य लक्षणगुणाः | ७८ | अथ चपलः | ,, |
| विमलभेदानां प्रयोगनिर्देशः | ,, | गुणाः | ८८ |
| विमलशोधनम् | ,, | शोधनम् | ८९ |