संग्रह पर लौटें




















रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)
Rasaratna Samuchchaya Hindi
रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री) द्वारा
स्रोत: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (उद्गम)
DevanagariHindipublished362 पृष्ठ
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[ २ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्कः |
|---|---|---|---|
| वैक्रान्तस्य गुणाः | ६९ | विमलस्य मारणम् | ७८ |
| वैक्रान्तोत्पत्तिः | ,, | विमलस्य सत्त्वपातनविधिः | ,, |
| वैक्रान्तस्य स्थानं निरुक्तिश्च | ७० | मतान्तरेण सत्त्वपातनम् | ७९ |
| मतान्तरेण वर्णभेदकथनम् | ,, | विमलस्य प्रयोगविधिर्गुणाश्च | ,, |
| वर्णभेदेन कार्यभेदकथनम् | ,, | अथ शिलाजंतु | ८० |
| आहरणविधिः | ७१ | शिलाजतुभेदाः | ,, |
| गुणान्तरम् | ,, | शिलाजतुन उत्पत्तिः | ,, |
| शोधनम् | ,, | शुद्धशिलाजतुलक्षणम् | ८१ |
| मतान्तरे शोधनमारणे | ७० | गुणाः | ८२ |
| मतान्तरम् | ७१ | शोधनम् | ८३ |
| सत्त्वपातनम् | ७२ | शिलाजतुमारणम् | ,, |
| मतान्तरम् | ,, | प्रयोगविधिः | ,, |
| मृतवैक्रान्तस्य प्रयोगविधिर्गुणाश्च | ,, | सत्त्वपातनम् | ,, |
| प्रयोगान्तरम् | ७३ | कर्पूरशिलाजतुनो लक्षणादिकम् | ८४ |
| अथ माक्षिकम् | ,, | सस्यकः | ,, |
| माक्षिकोत्पत्तिवर्णनम् | ,, | सस्यकोत्पत्तिवर्णनम् | ,, |
| माक्षिकस्य गुणाः | ,, | प्रशस्तसस्यकलक्षणम् | ,, |
| माक्षिकभेदाः | ७४ | गुणाः | ८५ |
| माक्षिकगुणाः | ७५ | शोधनम् | ,, |
| सुवर्णमाक्षिकशोधनमारणे | ,, | मतान्तरम् | ,, |
| सत्त्वपातनम् | ,, | तुत्थखर्परमारणम् | ,, |
| विशुद्धताम्यसत्त्वलक्षणम् | ७६ | तुत्थसत्त्वपातनम् | ,, |
| सुवर्णमाक्षिकरसायनम् | ,, | मतान्तरम् | ८६ |
| सुवर्णमाक्षिकरसायनम् | ७७ | प्रयोगविधिः | ,, |
| विमलभेदाः | ,, | भालुकितन्त्रोक्तप्रयोग विधिः | ,, |
| विमलस्य लक्षणगुणाः | ७८ | अथ चपलः | ,, |
| विमलभेदानां प्रयोगनिर्देशः | ,, | गुणाः | ८८ |
| विमलशोधनम् | ,, | शोधनम् | ८९ |
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[ ३ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| सत्त्वपातनम् | ८९ | कुष्ठे गन्धकप्रयोगः | १०० |
| रसकः | ” | कण्डूहर प्रयोगः | ” |
| सस्यकस्य प्रयोगविषयो गुणाश्च | ९० | गन्धकतैलम् | १०१ |
| शोधनम् | ” | गन्धकगुणाः | ” |
| मतान्तरम् | ” | गैरिकम् | ११० |
| रसकस्य ताम्रादिरञ्जनविधिः | ९१ | गैरिकभेदाः | ” |
| खर्परस्य भस्म तथा सत्त्वपातनविधिश्च | ” | पाषाणस्वर्णगैरिकयोर्लक्षणम् | ” |
| मतान्तरम् | ९२ | गैरिकशोधनम् | १११ |
| मतान्तरम् | ” | कासीसरसायनम् | ” |
| मतान्तरम् | ” | कासीसभेदाः | ” |
| सत्त्वमारणम् | ९३ | बालुकासीसगुणाः | ११२ |
| प्रयोगविधिः | ” | पुष्पकासीसगुणाः | ” |
| तृतीयोऽध्यायः । | कासीस शोधनम् | ” | |
| उपरसानां नामानि | ” | सत्त्वग्रहणनिर्देशः | ” |
| गन्धकोत्पत्तिः | ” | शोधनान्तरम् | ११३ |
| गन्धकभेदाः | ९५ | कासीसप्रयोगः | ” |
| गन्धकगुणाः | ९६ | तुवरीनिरूपणम् | ” |
| बलिवसाख्यगन्धकोत्पत्तिः | ” | तुवरीपरिचयः | ” |
| गन्धकशुद्धिः | ९७ | तुवरीभेदाः | ११४ |
| मतान्तरम् | ” | तुवरीलक्षणगुणाः | ” |
| मतान्तरम् | ९८ | तुवरीशोधनम् | ” |
| प्रयोगः | ” | तुवरीसत्त्वपातनविधिः | ” |
| गन्धकद्रुतिः | ” | तालकसन्निरूपणम् | ११५ |
| प्रयोगविधिः | ९९ | तालकभेदाः | ” |
| अन्यविधप्रयोगविधिः | ” | पत्रतालकलक्षणम् | ” |
| गन्धकसेवने वर्ज्यानि | ” | पिण्डतालकलक्षणम् | ” |
| गुणाः | ” |
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[ ४ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| हरतालशुद्धिः | ११६ | स्रोतोऽञ्जनसत्त्वपातनविधिः | १२४ |
| अशुद्धतालसेवनदोषाः | ,, | कङ्कुष्ठनिरूपणम् | ,, |
| मतान्तरेण तालशोधनम् | ,, | कङ्कुष्ठोत्पत्तिवर्णनम् | ,, |
| मतान्तरेण शोधनमारणनिरूपणम् | ,, | द्विविधकङ्कुष्ठलक्षणम् | ,, |
| सत्त्वपातनम् | ११७ | कङ्कुष्ठोत्पत्तौ मतान्तराणि | ,, |
| मतान्तरम् | ,, | गुणाः | १२५ |
| मनःशिलानिरूपणम् | ११९ | रसोपरसानां सामान्यशोधनं सत्त्वपातनविधिश्च | ,, |
| मनःशिलाया भेदाः | ,, | कङ्कुष्ठशोधनम् | ,, |
| त्रिविधमनःशिलालक्षणानि | ,, | रेचकयोगः | ,, |
| गुणाः | ,, | ताम्बूलानुपानवर्जनम् | १२६ |
| अशुद्धशुद्धदोषगुणाः | ,, | विषनाशार्थं कङ्कुष्ठप्रयोगविधिः | ,, |
| शोधनम् | १२० | साधारणरसपरिगणनम् | ,, |
| मतान्तरम् | ,, | कम्पिल्लः | ,, |
| सत्त्वपातनम् | ,, | गुणाः | १२७ |
| मतान्तरम् | ,, | गौरीपाषाणः | ,, |
| अञ्जनानां संनिरूपणम् | ,, | शोधनम् | १२८ |
| अञ्जनभेदाः | ,, | सत्त्वग्रहणम् | १२९ |
| सौवीराञ्जनगुणाः | १२२ | गुणाः | ,, |
| रसाञ्जनगुणाः | ,, | नवसारनिरूपणम् | ,, |
| स्रोतोऽञ्जनगुणाः | ,, | नवसारोत्पत्तिः | ,, |
| लेखनस्वरूपम् | ,, | मतान्तरेणोत्पत्तिः | १३० |
| पुष्पाञ्जनगुणाः | १२३ | गुणाः | ,, |
| नीलाञ्जनगुणाः | ,, | वराटिकावर्णनम् | ,, |
| शोधनम् | ,, | वराटिकालक्षणम् | ,, |
| अञ्जनसत्त्वाहरणम् | ,, | उत्तमादि वराटिका | ,, |
| स्रोतोऽञ्जनलक्षणम् | ,, | गुणाः | ,, |
| अञ्जनरसबन्धनम् | ,, | ||
| रसाञ्जनस्य विशेषशोधनम् | ,, |
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[ ५ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| शोधनम् | १३१ | माणिक्यम् | १३६ |
| अग्निजारनिरूपणम् | ,, | द्विविधमाणिक्यनिर्देशः | ,, |
| अग्निजारपरिचयः | ,, | श्रेष्ठमाणिक्यलक्षणम् | ,, |
| गुणाः | ,, | श्रेष्ठनीलमाणिक्यलक्षणम् | ,, |
| तस्य स्वभावतः शुद्धत्वनिर्देशः | ,, | निकृष्टमाणिक्यलक्षणम् | १३७ |
| गिरिसिन्दूरनिरूपणम् | १३२ | माणिक्यगुणाः | ,, |
| गिरिसिन्दूरगुणाः | ,, | मौक्तिकनिरूपणम् | ,, |
| हिङ्गुलनिरूपणम् | ,, | प्रशस्तमौक्तिकलक्षणम् | ,, |
| हिङ्गुलभेदाः | ,, | मौक्तिकशुक्त्योर्गुणाः | ,, |
| शुकतुण्डकस्य परिचयः | ,, | हेममौक्तिकम् | १३८ |
| हंसपादलक्षणम् | ,, | मौक्तिकगुणान्तरम् | ,, |
| हिङ्गुलगुणाः | ,, | प्रवालनिरूपणम् | ,, |
| शोधनम् | १३३ | ग्राह्यप्रवालस्वरूपः | ,, |
| हिङ्गुलसत्त्वाकर्षणविधिः | ,, | हेयप्रवालस्वरूपम् | ,, |
| मृद्दारशृङ्गम् | ,, | प्रवालगुणाः | १३९ |
| परिचयः | ,, | तार्क्ष्यम् | ,, |
| गुणाः | ,, | प्रशस्ततार्क्ष्यलक्षणम् | ,, |
| साधारणशोधननिर्देशः | १३४ | अप्रशस्ततार्क्ष्यलक्षणम् | ,, |
| सत्त्वानां सामान्यशोधनम् | ,, | तार्क्ष्यगुणाः | ,, |
| चतुर्थोऽध्यायः । | पुष्परागः | ,, | |
| रत्ननिरूपणम् | १३५ | श्रेष्ठपुष्परागलक्षणम् | ,, |
| मणयः | ,, | हेयपुष्परागलक्षणम् | १४० |
| मणीनां नामानि | ,, | पुष्परागगुणाः | ,, |
| श्रेष्ठमणीनां नामानि | ,, | वज्रम् | ,, |
| ग्रहप्रसादकरत्नानि | ,, | वज्रभेदाः | ,, |
| ग्रहानुसारेण रत्नपरिगणनम् | १३६ | पुंवज्रलक्षणम् | ,, |
| रत्नप्रयोगविषयः | ,, | स्त्रीनपुंसकवज्रयोर्लक्षणानि | ,, |
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[ ६ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| जातिभेदेनाधिकारीभेदकथनम् | १४१ | रत्नभस्मक्रमः | १४८ |
| वर्णभेदेनाधिकारीभेदकथनम् | ,, | रत्नानां द्रावणम् | ,, |
| वज्रगुणाः | ,, | मुक्ताद्रावणे विशेषक्रमः | ,, |
| रत्नदोषाः | १४२ | वज्रद्रावणविशेषविधिः | १५० |
| वज्रशोधनम् | ,, | वैक्रान्तद्रावणे विशेषक्रमः | ,, |
| वज्रमारणम् | ,, | अन्यविधिः | ,, |
| मतान्तरेण मारणम् | ,, | अन्यविधिः | ,, |
| मतान्तरेण मारणम् | १४३ | राजावर्त्तः | १५१ |
| मतान्तरेण मारणम् | १४४ | उत्तममध्यमराजावर्त्तलक्षणम् | ,, |
| प्रयोगविशेषेण गुणविशेषकथनम् | ,, | गुणाः | ,, |
| वज्ररसायनम् | ,, | राजावर्त्तादिसामान्यशोधनम् | ,, |
| नीलनिरूपणम् | १४५ | राजावर्त्तशोधनम् | ,, |
| नीलभेदाः | ,, | राजावर्त्तमारणम् | ,, |
| जलशक्रनीलयोः स्वरूपम् | ,, | सत्त्वपातनम् | १५२ |
| गुणाः | ,, | द्रुतीनां दीर्घकालरक्षणोपायः | ,, |
| गोमेदः | १४६ | रत्नधारणगुणाः | ,, |
| गोमेदर्निरुक्तिः | ,, | गैरिकम् | ,, |
| प्रशस्तगोमेद लक्षणम् | ,, | गैरिकस्य शोधनं सत्त्वपातनञ्च | ,, |
| हेयगोमेदलक्षणम् | ,, | पञ्चमोऽध्यायः । | |
| गुणाः | ,, | लोहानि | १५३ |
| रत्नमारणनिषेधः | ,, | लोहजातिपरिगणनम् | ,, |
| रत्नप्रयोगः | १४७ | स्वर्णम् | १५४ |
| रत्नानां साधारणशोधनम् | ,, | स्वर्णभेदाः | ,, |
| वैदूर्यम् | ,, | प्राकृतस्वर्णस्योत्पत्तिः | ,, |
| श्रेष्ठवैदूर्यलक्षणम् | ,, | सहजस्वर्णोत्पत्तिः | ,, |
| हेयवैदूर्यलक्षणम् | ,, | वह्निजस्वर्णोत्पत्तिः | ,, |
| गुणाः | ,, | स्वर्णत्रयगुणाः | १५५ |
| रत्नशुद्धिः | ,, |
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[ ७ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| खनिजस्वर्णोत्पत्तिस्तल्लक्षणगुणाश्च | १५५ | अन्यविधिः | १६२ |
| वेधजस्वर्णोत्पत्तिर्गुणाश्च | ,, | रौप्यस्य निरुत्थीभस्मकरणम् | ,, |
| स्वर्णरौप्ययोः सामान्यगुणाः | ,, | अन्यविधिः | ,, |
| स्वर्णगुणाः | १५६ | स्वर्णरौप्ययोर्द्रावणम् | ,, |
| अशोधितामारितस्वर्णदोषाः | ,, | रौप्यप्रयोगः | १६३ |
| स्वर्णशोधनम् | ,, | ताम्रम् | ,, |
| लौहमारणार्थमुत्तमद्रव्यकथनम् | ,, | ताम्रभेदाः | ,, |
| स्वर्णमारणम् | १५७ | म्लेच्छताम्रस्य लक्षणम् | ,, |
| अन्यविधिः | ,, | नेपालताम्रलक्षणम् | ,, |
| अन्यविधिः | ,, | रसकर्मानर्हताम्रलक्षणम् | १६४ |
| स्वर्णद्रावणम् | ,, | गुणाः | ,, |
| अन्यविधिः | १५८ | ताम्रस्य दोषाः | ,, |
| स्वर्णभस्मप्रयोगविधिः | ,, | ताम्रशुद्धिः | १६५ |
| अशुद्धामारितस्वर्णदोषाः | ,, | मतान्तरम् | ,, |
| रजतम् | १५९ | मतान्तरम् | ,, |
| रजतभेदाः | ,, | मतान्तरम् | ,, |
| सहजरौप्योत्पत्तिर्गुणाश्च | ,, | ताम्रभस्म | ,, |
| खनिजरौप्योत्पत्तिर्गुणाश्च | ,, | अन्यविधिः | १६६ |
| कृत्रिमरौप्योत्पत्तिर्गुणाश्च | ,, | मारणान्तरम् | ,, |
| उत्तमरौप्यलक्षणम् | ,, | सोमनाथीताम्रभस्म | ,, |
| निकृष्टरौप्यलक्षणम् | १६० | ताम्रभस्मगुणाः | १६७ |
| रौप्यगुणाः | ,, | ग्रन्थान्तरोक्त ताम्रप्रयोगः | ,, |
| गुणान्तरम् | ,, | अथलौहम् | १६८ |
| स्वर्णादिशोधनम् | ,, | लौहभेदाः | ,, |
| अशोधितमारितलोहस्य दोषाः | १६१ | मुण्डलौहभेदाः | ,, |
| रौप्यस्य विशेषशोधनम् | ,, | मृदुमुण्डलक्षणम् | ,, |
| अन्यविधिः | ,, | कुण्ठमुण्डलक्षणम् | ,, |
| रौप्यमारणम् | ,, |
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[ ८ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| कडारमुण्डलक्षणम् | १६९ | मारणार्थं लौहस्य परिमाणनिर्देशः | १७४ |
| मुण्डगुणाः | ,, | लौहमारणे मन्त्रः | ,, |
| अशुद्धलौहस्य दोषाः | ,, | लौहत्रयाणामुत्तरोत्तरगुणाधिक्यम् | ,, |
| तीक्ष्णलौहम् | ,, | सर्वलौहशुद्धिः | १७५ |
| तीक्ष्णलौहभेदाः | ,, | लौहस्थगिरिजदोषनाशनविधिः | ,, |
| खरलौहलक्षणम् | ,, | मतान्तरम् | ,, |
| सारलौहलक्षणम् | १७० | मतान्तरेण शोधनं मारणञ्च | १७६ |
| हृन्नाललौहलक्षणम् | ,, | मतान्तरेण मारणञ्च | ,, |
| सपर्यायपोगरलक्षणम् | ,, | तीक्ष्णलौहस्य मारणम् | ,, |
| वाजीरलौहलक्षणम् | ,, | कान्तलौहस्य गुणाः | १७७ |
| काललौहलक्षणम् | ,, | लौहस्य मारणान्तरम् | ,, |
| खरलौहगुणाः | १७१ | तीक्ष्णलौहस्य विशेषमारणम् | १७८ |
| अन्यसारादितीक्ष्णलौहगुणाः | ,, | मतान्तरम् | ,, |
| कान्तलोहभेदाः | ,, | मतान्तरे सर्वलौहानां मारणम् | ,, |
| वर्णानुसारकार्यभेदाः | ,, | अन्यविधिः | १७९ |
| अधमादिकथनम् | १७२ | अन्यविधिः | ,, |
| भ्रामककान्तलक्षणम् | ,, | अन्यविधिः | ,, |
| चुम्बककर्षकलक्षणम् | ,, | कान्तलोहस्य रामराजीप्रोक्तशोधनम् | १८० |
| द्रावककान्तलक्षणम् | ,, | अन्यविधिः | १८१ |
| रोमकान्तलक्षणम् | ,, | लौहप्रयोगः | ,, |
| मुखभेदेन श्रेष्ठाश्रेष्ठकथनम् | ,, | लौहानां रामराजीप्रोक्तगुणाः | १८२ |
| भ्रामकादिलौहकार्यनिर्देशः | १७३ | श्रेष्ठकान्तलौहस्य लक्षणम् | ,, |
| रसक्रमेण कान्तस्य विशेषता | ,, | लौहद्रुतिः | ,, |
| कान्तलौहस्य ग्राह्याग्राह्यनिर्देशः | ,, | कान्तलौहस्य विशेषमारणम् | १८३ |
| कान्तलौहलक्षणम् | १७४ | अथाष्टलौहानां द्रावणम् | ,, |
| कान्तलौहगुणाः | ,, | मतान्तरम् | ,, |
| लौहकल्पश्रेष्ठता | ,, | अशुद्धपक्वलौहदोषः | ,, |
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[ ९ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| उत्तरोत्तरमधिकगुणकरं लौहम् | १८४ | नागरसायनम् | १९२ |
| मण्डूरम् | ,, | पित्तलम् | ,, |
| मण्डूरशोधनम् | ,, | पित्तलभेदः | ,, |
| मतान्तरम् | ,, | रीतिकालक्षणम् | ,, |
| लौहमण्डूरयोर्गुणसाम्यता | १८५ | काकतुण्डी लक्षणम् | ,, |
| वङ्गनिरूपणम् | ,, | रीतिकाया गुणाः | ,, |
| वङ्गस्य द्वैविध्यनिर्देशः | ,, | काकतुण्ड्या गुणाः | १९३ |
| खुरकवङ्गस्य मिश्रकवङ्गस्य च लक्षणम् | ,, | शुभरीतिकालक्षणम् | ,, |
| वङ्गगुणाः | ,, | अशुभरीतिलक्षणम् | ,, |
| खुरकवङ्गशोधनम् | ,, | रीतिकाशोधनम् | ,, |
| मिश्रकवङ्गशोधनम् | ,, | रीतिका मारणम् | ,, |
| नागवङ्गकांस्यताम्राणां सामान्यशोधनम् | ,, | मतान्तरम् | १९४ |
| वङ्गभस्म | ,, | पित्तलरसायनम् | ,, |
| मतान्तरम् | ,, | पित्तलद्रुतिः | ,, |
| मतान्तरम् | १८६ | कांस्यम् | १९५ |
| मतान्तरम् | ,, | कांस्योत्पत्तिवर्णनम् | ,, |
| वङ्गरसायनम् | ,, | प्रशस्तकांस्यलक्षणम् | ,, |
| नागः | १८८ | त्याज्यकांस्यलक्षणम् | ,, |
| शुद्धसीसकलक्षणम् | ,, | कांस्यगुणाः | ,, |
| सीसकगुणाः | १८९ | कांस्यशोधनम् | १९६ |
| नागशुद्धिः | ,, | कांस्यमारणम् | ,, |
| नागभस्म | ,, | मतान्तरम् | ,, |
| मतान्तरम् | १९० | वर्तलौहम् | ,, |
| नागस्य निरुत्थभस्मीकरणम् | ,, | वर्तलौहस्वरूपः | ,, |
| मतान्तरम् | १९१ | वर्तलौहगुणाः | ,, |
| वर्तलौहशोधनम् | १९७ | ||
| वर्तलौहमारणम् | ,, |
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[ १० ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| रसोपरसलोहानां सूतसाधकत्वनिर्देशः | १९७ | ध्यानम् | २०७ |
| रत्नादीनां सूतयोग्यत्वनिर्देशः | ” | देवीपूजनमन्त्रम् | ” |
| भूनागसत्त्वपातनम् | १९८ | कुम्भस्थापनादिशिष्यदीक्षादानविधिः | २०८ |
| मतान्तरम् | १९९ | कालिनीलक्षणम् | २०९ |
| भूनागमुद्रिका | २०० | कालिन्यभावे तदनुकल्पविधिः | ” |
| तैलपातनविधिः | ” | होमविधिः | २१० |
| मतान्तरम् | ” | रससिद्ध्यर्थं सङ्ग्रहणीयपदार्थास्तत्पूजनादिकञ्च | २११ |
| मतान्तरम् | २०१ | रसशक्तयः | ” |
| मतान्तरम् | ” | उपरसाः | ” |
| तैलपातनम् | २०२ | महारसाः | २१२ |
| विष्णुसृष्टितैलपातनम् | ” | अष्टलौहपूजाक्रमः | ” |
| जैपालतैलपातनम् | ” | उपकरणानां पूजाविधिः | ” |
| वाकुचीतैलाहरणविधिः | ” | रससिद्धीश्वरब्राह्मणादीनां पूजनम् | २१३ |
| कृष्णमिश्रश्वेतगुञ्जाबीजतैलपातनविधिः | ” | अदीक्षितस्य रसविद्यासाधनवैफल्यनिर्देशः | २१४ |
| षष्ठोऽध्यायः । | रससाधने सिद्धिलाभहेतुनिर्देशः | ” | |
| शिष्योपनयननिरुपणम् | २०३ | कस्मै किमर्थं रसविद्यादातव्या तन्निर्देशः | २१५ |
| क्रमयुक्तशास्त्रम् | ” | गुरुसन्तोषस्य सर्वसिद्धिहेतुत्वनिर्देशः, | ” |
| शास्त्रक्रमयोः परस्परापेक्षा | ” | रसविद्याया अवश्यगोप्यत्वनिर्देशः | ” |
| रसविद्यागुरुः | ” | सप्तमोऽध्यायः । | |
| शिष्यगुणाः | २०४ | रसशाला | २१६ |
| अनुचरगुणाः | ” | रससाधनीयपदार्थाः | २१७ |
| अयोग्यशिष्याः | ” | चालनीभेदलक्षणादिकम् | २१८ |
| रससाधनरसशालारस मण्डपाः | २०५ | रससिद्ध्युपकरणानि | ” |
| रसलिङ्गस्थापनादि | २०६ | ||
| रसलिङ्गपूजनफलम् | ” |
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[ ११ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| उपलनामानि | २१९ | कजली | २२५ |
| कूपीनिर्माणद्रव्याणि | ,, | रसपङ्कः | ,, |
| कूपीपर्यायाः | ,, | पिष्टी | ,, |
| चषकस्य पर्यायाः | ,, | मतान्तरम् | ,, |
| शूर्पादीनां समर्चनम् | ,, | पातनपिष्टी | ,, |
| रसविद्यायां कीदृशा वैद्या अन्ये वा नियोज्यास्तत्कथनम् | २२० | स्वर्णरौप्ययोः कृष्टिः | २२६ |
| रसपाककाले मन्त्रजपस्य कर्तव्यतानिर्देशः | ,, | कृष्ट्या उपयोगः | ,, |
| परिचारकलक्षणम् | ,, | स्वर्णकृष्ट्याः कार्यम् | ,, |
| पद्महस्तवैद्यलक्षणम् | २२१ | वरलोहकम् | ,, |
| अमृतहस्तवैद्यलक्षणम् | ,, | हेमरक्ती | ,, |
| दग्धहस्तवैद्यलक्षणम् | ,, | हेमरक्तीप्रयोगः | ,, |
| निधिरक्षायोग्यपुरुषाः | ,, | ताररक्ती | २२७ |
| बलिसाधने नियोज्यपुरुषलक्षणम् | ,, | दलम् | ,, |
| रसायने नियोज्यपुरुषलक्षणम् | २२२ | अन्यविधदलम् | ,, |
| स्वर्णादिधातुसिद्धिनियुक्तियोग्यपुरुषाः | ,, | शुल्बनागम् | ,, |
| भेषजाहरणे नियोज्यपुरुषलक्षणम् | ,, | शुल्बनागगुणाः | २२८ |
| केषां रससिद्धिर्भवतीत्याह | ,, | पिञ्जरी | ,, |
| रससिद्धसाधकस्य कर्तव्यनिर्देशः | ,, | चन्द्रार्कम् | ,, |
| रससिद्धमर्त्यफलम् | २२३ | निर्वापणम् | २२९ |
| अष्टमोऽध्यायः । | निर्वापणद्रव्यमात्रा | ,, | |
| परिभाषा | २२४ | वारितरलौहलक्षणम् | ,, |
| धन्वन्तरिभागः | ,, | मृतलौहलक्षणम् | ,, |
| रुद्रभागः | ,, | अपुनर्भवलक्षणम् | ,, |
| विश्वासघातकवैद्यलक्षणम् | ,, | उत्तमभस्मलक्षणम् | २३० |
| निरुत्थलौहलक्षणम् | ,, | ||
| बीजलक्षणम् | ,, | ||
| ताडनस्वरूपम् | ,, | ||
| धान्याभ्रलक्षणम् | ,, |
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[ १२ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| सत्त्वलक्षणम् | २३१ | उत्थापनादिलक्षणम् | २३७ |
| एककोलिसकलक्षणम् | ” | बन्धनलक्षणम् | ” |
| द्रावणादिकर्मसाधनेकाष्ठनिर्देशः | ” | पातनलक्षणम् | ” |
| हिङ्गुलाकृष्टो रसः | ” | रोधनलक्षणम् | २३८ |
| घोषाकृष्टताम्रलक्षणम् | ” | नियमनलक्षणम् | ” |
| वरनागलक्षणम् | २३२ | दीपनलक्षणम् | २३९ |
| उत्थापनलक्षणम् | ” | ग्रासमानम् | ” |
| ढालनलक्षणम् | ” | जारणाभेदनिर्देशः | ” |
| नागसम्भूतचपलः | ” | निर्मुखजारणालक्षणम् | २४० |
| वङ्गसम्भूतचपलः | २३३ | बीजादिनिर्देशः | ” |
| चपलकार्यम् | ” | मुखलक्षणम् | ” |
| बद्धरसोपयोगः | ” | सम्मुखजारणालक्षणम् | ” |
| धौतम् | ” | राक्षसवरसलक्षणम् | ” |
| द्वन्द्दानम् | २३४ | चारणालक्षणम् | २४१ |
| भञ्जनी | ” | गर्भद्रुतिलक्षणम् | ” |
| चुल्लका | ” | बाह्यद्रुतिलक्षणम् | ” |
| पतङ्गीरागः | ” | द्रुतेर्भेदाः | ” |
| आवापः | ” | द्रुतेः स्वरूपम् | ” |
| अभिषेकः | २३५ | जारणाभेदः | ” |
| निर्वापलक्षणम् | ” | जारणालक्षणम् | ” |
| प्रतिवापसमयनिर्देशः | ” | बिडादिलक्षणम् | २४२ |
| शुद्धावर्तः | ” | रञ्जनलक्षणम् | ” |
| बीजावर्तः | ” | सारणालक्षणम् | ” |
| स्वाङ्गशीतलम् | ” | वेधलक्षणं भेदाश्च | ” |
| बहिःशीतलम् | २३६ | लेपवेधलक्षणम् | २४३ |
| स्वेदनलक्षणम् | ” | क्षेपवेधलक्षणम् | ” |
| मर्दनलक्षणम् | ” | कुन्तवेधलक्षणम् | ” |
| मूर्च्छनलक्षणम् | ” | धूमवेधलक्षणम् | ” |
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[ १३ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| शब्दवेधलक्षणम् | २४४ | प्रकारान्तरम् | २५४ |
| उद्घाटनलक्षणम् | ,, | नालिकायन्त्रम् | ,, |
| स्वेदनलक्षणम् | ,, | भूधरयन्त्रम् | ,, |
| सन्न्यास लक्षणम् | ,, | पुटयन्त्रम् | ,, |
| रसस्वेदसन्यासगुणाः | २४५ | कोष्ठीयन्त्रम् | २५५ |
| परिभाषाऽऽवश्यकता | ,, | वलभीयन्त्रम् | ,, |
| अध्यायपठनफलम् | ,, | तिर्यक्पातनयन्त्रम् | २५६ |
| नवमोऽध्यायः । | पालिकायन्त्रम् | ,, | |
| यन्त्राणि | २४६ | घटयन्त्रम् | ,, |
| यन्त्रशब्द निरुक्तिः | ,, | इष्टिकायन्त्रम् | २५७ |
| दोलायन्त्रम् | ,, | हिङ्गुलाकृष्टिविद्याधरयन्त्रम् | ,, |
| स्वेदनीयन्त्रम् | २४७ | डमरुयन्त्रम् | २५८ |
| पातनायन्त्रम् | ,, | नालियन्त्रम् | ,, |
| अधःपातनयन्त्रम् | २४८ | तोयमृल्लक्षणम् | ,, |
| कच्छपयन्त्रम् | ,, | वह्निमृत्सा | २५९ |
| दीपिकायन्त्रम् | ,, | शेषनाभियन्त्रवर्णनम् | ,, |
| ढेकीयन्त्रम् | २४९ | ग्रस्तयन्त्रम् | ,, |
| जारणायन्त्रम् | ,, | स्थालीयन्त्रम् | २६० |
| जारणायन्त्रस्य– | ,, | धूपयन्त्रम् | ,, |
| प्रकारान्तरम् | २५० | कन्दुकयन्त्रम् | २६१ |
| विद्याधरयन्त्रम् | २५१ | प्रकारान्तरम् | ,, |
| सोमानलयन्त्रम् | ,, | खल्लयन्त्रम् | २६२ |
| गर्भयन्त्रम् | ,, | खल्लयन्त्रस्य त्रैविध्यनिर्देशः | ,, |
| हंसपाकयन्त्रम् | २५२ | द्विविधखल्लयोः सामान्यलक्षणम् | ,, |
| बालुकायन्त्रम् | २५३ | अर्धचन्द्राकृतिकखल्लनिर्देशः | ,, |
| बालुकायन्त्रस्य प्रकारान्तरम् | ,, | वर्तुलखल्लनिर्देशः | २६३ |
| लवणयन्त्रम् | ,, | तप्तखल्लप्रमाणनिर्देशः | ,, |
| तप्तखल्लविधिः | ,, |
पृष्ठ 32स्थायी लिंक
[ १४ ]
दशमोऽध्यायः ।
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| मूषादिकथनम् | २६४ | मूसलाख्यमूषा | २७१ |
| मूषायाः पर्यायाः | ,, | कोष्ठिकानिर्देशः | ,, |
| मूषाया निरुक्तिः | ,, | अङ्गारकोष्ठी | २७२ |
| मूषाया उपादानम् | २६५ | पातालकोष्ठी | २७३ |
| मूषा शंसा | ,, | गारकोष्ठी | ,, |
| सन्धिलेपस्य पर्यायाः | ,, | वङ्कनालम् | २७४ |
| मूषोपयुक्तमृत्तिका | ,, | मूषाकोष्ठी | ,, |
| मतान्तरम् | २६६ | पुटस्य लक्षणम् | २७५ |
| मूषामृत्तिकायां संयोज्यद्रव्याणि | ,, | पुटस्य फलम् | ,, |
| वज्रमूषा | ,, | महापुटम् | २७७ |
| योगमूषा | ,, | गजपुटम् | ,, |
| वज्रद्रावणीमूषा | २६७ | वाराहपुटम् | २७८ |
| गारमूषा | ,, | कुक्कुटपुटम् | ,, |
| वरमूषा | ,, | कपोतपुटम् | ,, |
| वर्णमूषा | २६८ | गोर्वरस्वरूपम् | ,, |
| रौप्यमूषा | ,, | गोर्वरपुटलक्षणम् | २७९ |
| विडमूषा | ,, | भाण्डपुटम् | ,, |
| वज्रद्रावणमूषा | ,, | बालुकापुटम् | ,, |
| मूषाऽऽप्यायनम् | २६९ | भूधरपुटम् | २८० |
| वृन्ताकमूषा | ,, | लावकपुटम् | ,, |
| गोस्तनीमूषा | २७० | अनुक्तपुटमानेकर्त्तव्यनिर्देशः | २८१ |
| मल्लमूषा | ,, | उपलपर्यायाः | ,, |
| पक्कमूषा | ,, | कृत्रिमाकृत्रिमलौहनिर्देशः | ,, |
| गोलमूषा | ,, | षल्लवणानि | २८२ |
| महामूषा | २७१ | क्षारत्रयम् | ,, |
| मण्डूकमूषा | ,, | क्षारपञ्चकम् | ,, |
| मधुरत्रयम् | २८३ |
पृष्ठ 33स्थायी लिंक
[ १५ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| रसकर्मणितैलाहरणोपयोगिद्रव्याणि | २८३ | व्याधिविशेषेरसप्रयोगनिषेधः | २९३ |
| वसावर्गः | ,, | शुद्धमूर्च्छितरसगुणाः | ,, |
| मूत्रवर्गः | ,, | मृतपारदगुणाः | ,, |
| माहिषपञ्चकच्छागलपञ्चकयोर्निर्देशः | २८४ | रसदोषास्तेषां कार्याणि च | ,, |
| अम्लवर्गः | ,, | संस्कारार्थं पारदस्य परिमाणनिर्देशः | २९४ |
| अम्लपञ्चकम् | ,, | स्वेदनसंस्कारः | २९५ |
| पञ्चमृत्तिका | २८५ | मर्दन संस्कारः | २९६ |
| विषवर्गः | ,, | मूर्च्छनसंस्कारः | २९७ |
| उपविषवर्गः | २८६ | उत्थापनसंस्कारः | २९८ |
| दुग्धवर्गः | ,, | पातनसंस्कारः | २९९ |
| विड्वर्गः | २८७ | उर्द्ध्वाधः पातनयोः सङ्ख्यानिर्देशः | ३०० |
| रक्तवर्गः | ,, | अधःपातनविधिः | ,, |
| पीतवर्गः | २८८ | पातने प्रकारान्तराणि | ,, |
| श्वेतवर्गः | ,, | तिर्यक्पातनम् | ३०१ |
| कृष्णवर्गः | ,, | मर्दनादीनां गुणाः | ३०३ |
| रक्तवर्गादीनां प्रयोजननिर्देशः | ,, | निरोधसंस्कारः | ,, |
| शोधनीयगणः | ,, | नियमनसंस्कारः | ३०४ |
| लौहमलनाशनगणः | २८९ | प्रकारान्तरम् | ३०५ |
| लौहकाठिन्यनाशकयोगः | ,, | दीपनसंस्कारः | ,, |
| द्रावकवर्गः | ,, | प्रकारान्तरेण दीपनम् | ३०६ |
| क्षारादिकानां कार्यम् | ,, | रसभावनादौ मूलिन्यः | ३०७ |
| एकादशोऽध्यायः। | सूतसंस्कारकार्यत्वनिर्देशः | ३०९ | |
| रसशोधनादिकथनम् | २९० | रसबन्धनप्रतिज्ञा तस्य व्युत्पत्तिश्च | ,, |
| मानपरिभाषा | ,, | रसबन्धाः | ,, |
| मानपरिभाषायां मतान्तरम् | २९१ | हठबन्धः | ३१० |
| अष्टादशसंस्काराः | २९२ | आरोटबन्धः | ,, |
पृष्ठ 34स्थायी लिंक
[ १६ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| आभासबन्धः | ३११ | प्रकारान्तरेण जलूकानिर्माणम् | ३२३ |
| क्रियाहीनबन्धः | ३१२ | प्रकारान्तरम् | ३२४ |
| पिष्टिकाबन्धः | ,, | प्रकारान्तरम् | ,, |
| क्षारबन्धः | ,, | प्रकारान्तरम् | ३२५ |
| खोटबन्धः | ३१३ | प्रकारान्तरम् | ३२६ |
| पोटबन्धलक्षणम् | ,, | योनिद्रावणम् | ,, |
| कल्कबन्धलक्षणम् | ,, | मदनवलयम् | ३२७ |
| कजलीबन्धलक्षणम् | ३१४ | प्रकारान्तरम् | ,, |
| सजीवबन्धलक्षणम् | ,, | पारदभस्म | ३२८ |
| निर्जीवबन्धलक्षणम् | ३१५ | प्रकारान्तरम् | ,, |
| निर्बीजबन्धलक्षणम् | ,, | प्रकारान्तरम् | ,, |
| सबीजबन्धलक्षणम् | ,, | प्रकारान्तरम् | ,, |
| शृङ्खलाबन्धलक्षणम् | ३१६ | प्रकारान्तरम् | ३२९ |
| द्रुतिबन्धलक्षणम् | ,, | प्रकारान्तरम् | ,, |
| बालकबन्धलक्षणम् | ३१७ | प्रकारान्तरम् | ३३० |
| कुमारबन्धलक्षणम् | ,, | प्रकारान्तरम् | ,, |
| तरुणबन्धलक्षणम् | ३१८ | रसभस्मविधिः | ३३१ |
| वृद्धबन्धलक्षणम् | ,, | पारदभस्मनि पथ्यम् | ३३२ |
| मूर्तिबन्धलक्षणम् | ,, | पारदभस्मनि कुपथ्यम् | ,, |
| जलबन्धलक्षणम् | ३१९ | देवीशास्त्रोक्तककरादिगणः | ३३३ |
| अग्निबन्धलक्षणम् | ,, | श्रीकृष्णदेवोक्तककरादिगणः | ३३४ |
| सूतानां मूर्च्छाकल्पः | ,, | ककारादिनिषेधस्यापवादः | ३३५ |
| महाबन्धलक्षणम् | ३२१ | पारदविकार उपायाः | ,, |
| जलूकाबन्धः | ,, | रससेवने उपचारविधिः | ,, |
| क्रियाविशेषेण जलूकाया गुणविशेषः | ३२२ | द्वादशोऽध्यायः । | |
| जलूकायाः त्रिविधप्रमाणनिर्देशः | ,, | ज्वरचिकित्सा | ३३६ |
| जलूकायाः संस्कारविशेषः | ३२३ | रोगगणना | ,, |
पृष्ठ 35स्थायी लिंक
[ १७ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| वातज्वरलक्षणम् | ३३७ | चातुर्थिकगजाङ्कुशरसः | ३६८ |
| पित्तज्वरलक्षणम् | ३३८ | मृत्युञ्जयरसः | ३६९ |
| कफज्वरलक्षणम् | ,, | पञ्चवक्त्ररसः | ,, |
| द्विदोषजत्रिदोषजज्वरकथनम् | ३३९ | उन्मत्तरसः | ३७० |
| त्रैलोक्यसुन्दररसः | ३४० | सन्निपाताञ्जनरसः | ,, |
| त्रैलोक्यडम्बररसः | ३४१ | नस्यम् | ३७१ |
| मेघनादरसः | ३४३ | प्रतापलङ्केश्वररसः | ,, |
| ज्वरगजहरिरसः | ,, | प्राणेश्वररसः | ३७३ |
| दीपिकारसः | ३४४ | मृतसञ्जीवनरसः | ३७४ |
| शीतभञ्जीरसः | ३४५ | द्वितीयमृतसञ्जीवनरसः | ३७५ |
| प्रकारान्तरेण शीतभञ्जीरसः | ३४६ | सन्निपातकुठाररसः | ३७६ |
| मृतजीवनरसः | ३४७ | नवज्वरारिरसः | ३७७ |
| वृद्धज्वराङ्कुशरसः | ३४९ | जलमञ्जरीरसः | ३७८ |
| महाज्वराङ्कुशरसः | ,, | कान्तरसः | ३७९ |
| मृत्युञ्जयरसः | ३५१ | चन्द्रोदयरसः | ,, |
| सर्व्वज्वरादिरसः | ,, | जीर्णज्वरारिरसः | ३८० |
| चन्द्रसूर्यरसः | ३५२ | नवज्वरमुरारिरसः | ३८१ |
| विषप्रयोगायोग्यनिर्देशः | ३५३ | त्रयोदशोऽध्यायः। | |
| उमाप्रसादनोरसः | ३५४ | रक्तपित्तम् | ३८४ |
| ज्वराङ्कुशरसः | ३५५ | रक्तपित्ताङ्कुशरसः | ३८५ |
| सर्वाङ्गसुन्दरचिन्तामणिरसः | ३५६ | चन्द्रकलारसः | ३८६ |
| लोकनाथगुटिका | ३५७ | पटोलादियोगः | ३८८ |
| सूचिकाभरणरसः | ३५९ | रसेन्द्रयोगः | ३८९ |
| शार्ङ्गष्टादिवर्गः | ३६४ | अन्यश्च | ,, |
| सूचीमुखरसः | ३६५ | नवनीतादियोगः | ,, |
| सन्निपातगजाङ्कुशरसः | ३६६ | शिरोलेपः | ,, |
| चातुर्थिकहरो रसः | ३६७ | द्राक्षादिक्वाथः | ३९० |
३ र० स०
पृष्ठ 36स्थायी लिंक
[ १८ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| योगद्वयम् | ३९० | कज्जलयोगः | ४०७ |
| सितामृता | ,, | शिलापूतरसः | ,, |
| कासः | ,, | मन्थानभैरवरसः | ४०९ |
| कासनाशनरसः | ३९१ | विश्वादिवटिका | ४१० |
| कासहररसः | ,, | सामान्योपचाराः | ४११ |
| रक्तकाण्डरसः | ३९२ | तत्र रास्नादिक्षीरम् | ,, |
| भूताङ्कुशरसः | ३९३ | हिक्काघ्नधूमः | ,, |
| बोलबद्धरसः | ३९४ | गन्धपाषाणयोगः कफेभेषजविशेषनिर्देशश्च | ४१२ |
| अग्निरसः | ३९५ | स्वरभङ्गः | ,, |
| स्वयमग्निरसः | ,, | पर्पटीरसः | ४१३ |
| सामान्योपायाः | ३९६ | कफरोगे क्रियासूत्रम् | ४१७ |
| भृङ्गराजयोगः | ,, | चतुर्दशोऽध्यायः । | |
| अर्कादियोगः | ,, | राजयक्ष्मा | ,, |
| कासघ्नधूमद्वयम् | ,, | कनकसुन्दररसः | ४१८ |
| क्षयकासान्तकयोगः | ३९८ | राजमृगाङ्करसः | ४२१ |
| श्वासः | ,, | शङ्खेश्वररसः | ,, |
| ऊर्ध्वश्वासादिः | ३९९ | मृगाङ्कपोट्टलीरसः | ४२२ |
| सूर्यावर्तरसः | ,, | मृगाङ्कपोट्टलीरसः | ४२३ |
| श्वासान्तकरसः | ४०० | यक्ष्मणि औषधविशेषसेवनोपदेशः | ,, |
| श्वासारिवटकः | ४०१ | पञ्चामृतरसः | ४२४ |
| सप्तामृतावटी | ,, | जयन्तीप्रयोगः | ,, |
| नीलकण्ठरसः | ४०२ | क्षयशामकरसः | ,, |
| श्वासकासकरिकेसरी रसः | ४०३ | लोकनाथरसः | ४२५ |
| सूर्यरसः | ४०४ | वैद्यनाथरसः | ४२८ |
| सामान्योपचाराः | ,, | लोकनाथरसः | ४२९ |
| हिक्का | ४०५ | ||
| हिक्कानाशनरसः | ४०७ |
पृष्ठ 37स्थायी लिंक
[ १९ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| प्राणनाथरसः | ४३० | वातार्शोलक्षणम् | ४५२ |
| वज्ररसः | ४३१ | अर्शःकुठाररसः | ४५३ |
| महावीररसः | ४३३ | पित्तार्शोहररसः | ४५४ |
| अरुचिस्तस्या निदानम् | ४३५ | सर्व्वलोकाश्रयरसः | ४५५ |
| अरुचेः सलक्षणभेदाः | ,, | अर्शोघ्नवटकम् | ४५६ |
| अरुचि-चिकित्सा | ,, | अर्शोघ्नी वटिका | ४५७ |
| यवानीखाण्डवचूर्णम् | ,, | मूलकुठाररसः | ४५८ |
| छर्द्दिरोगः | ४३६ | महोदयप्रत्ययसाररसः | ४६१ |
| वान्तिचिकित्सायां मातुलुङ्गादि योगः- | ४३७ | कनकसुन्दररसः | ४६२ |
| रजन्यादियोगः | ,, | भर्कैशः | ४६४ |
| सुगन्धालककयोगौ | ४३८ | तीक्ष्णमुखरसः | ४६६ |
| हृदयरोगः | ४३८ | अर्शःकुठाररसः | ४६७ |
| हृदयरोग-चिकित्सा | ,, | त्रैलोक्यतिलकरसः | ४६८ |
| दशमूलादिक्वाथः | ,, | सामान्योपचाराः | ४७२ |
| ककुभाद्यं चूर्णम् | ,, | वचादिमोदकः | ,, |
| हृदयार्णवोरसः | ४४० | लौहादिचूर्णम् | ,, |
| नागार्जुनाभ्रम् | ,, | श्लेष्मार्शसि औषधविशेषनिर्देशः | ४७३ |
| पञ्चाननरसः | ४४१ | अर्शोहरयोगः | ,, |
| तृष्णारोगः | ,, | देवदाल्दादिलेपः | ,, |
| तृष्णाहररसः | ४४२ | अर्शःकुठारलेपः | ४७४ |
| मदात्ययरोगः | ,, | अर्शोघ्नशौचः | ,, |
| राजावर्त्तरसः | ४४४ | दुर्नामहरलेपः | ,, |
| द्वितीयराजावर्त्तरसः | ,, | अर्शोघ्नीवर्तिः | ,, |
| भैरवनाथी पञ्चामृतपर्पटी | ४४५ | अर्कक्षीरादिलेपः | ४७५ |
| पञ्चदशोऽध्यायः। | ४५० | शिग्रुमूलादिलेपः | ,, |
| अर्शः | ,, | षोडशोऽध्यायः। | ४७६ |
| पित्तार्शोलक्षणम् | ४५१ | उदावर्त्तः | ,, |
पृष्ठ 38स्थायी लिंक
[ २० ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| उदावर्त्तहरघृतम् | ४७७ | सामान्योपायाः | ५०४ |
| अतिसारः | ४७९ | वह्यादिचूर्णम् | ,, |
| दर्दुररसः | ४८० | दग्धशम्बूकादियोगः | ,, |
| द्वितीयदर्दुररसः | ४८१ | अन्योपायः | ५०५ |
| आनन्दभैरवरसः | ,, | अजीर्णम् | ,, |
| सुधासाररसः | ४८२ | अजीर्णकण्टकरसः | ५०६ |
| रसोत्तमः | ४८४ | विध्वंसरसः | ,, |
| स्वेदनीयन्त्रलक्षणम् | ४८५ | विसूचीविजयरसः | ५०७ |
| लोकेश्वररसः | ,, | अग्निकुमाररसः | ,, |
| लोकनाथरसः | ४८६ | वडवाग्निरसः | ५०८ |
| नागसुन्दररसः | ,, | वैश्वानरपोटलीरसः | ५०९ |
| षणिष्कतैलम् | ४८८ | चराचरवटी लक्षणम् | ५१० |
| सङ्ग्रहणी | ४८६ | श्रेष्ठमध्यमाधमवराटिकायालक्षणम् | ५११ |
| वज्रकपाटरसः | ,, | पुंवराटलक्षणं तस्य दोषाश्च | ,, |
| अग्निकुमाररसः | ४९० | वडवामुखी गुटी | ,, |
| कनकसुन्दररसः | ४९१ | क्रव्यादरसः | ५१२ |
| ग्रहणीहररसः | ४९२ | राजशेखरवटी | ५१४ |
| चण्डसङ्ग्रहगदैककपाटरसः | ,, | अग्निकुमाररसः | ५१५ |
| लघुसिद्धाभ्रकरसः | ४९३ | अमृतवटी | ५१६ |
| सर्वरोगरसः | ४९४ | राक्षसनामारसः | ५१७ |
| ग्रहणीगजकेसरीरसः | ४९७ | जीवननामारसः | ५१८ |
| शीघ्रप्रभावरसः | ४९९ | वडवानलरसः | ५१९ |
| पोट्टलीरसः | ५०० | अग्निजननीवटी | ५२० |
| वह्निज्वालावटोरसः | ५०१ | सर्वरोगान्तका वटी | ,, |
| वज्रधररसः | ५०२ | सामान्योपायः | ५२१ |
| ग्रहणीकपाटरसः | ,, | सप्तदशोऽध्यायः । | |
| सौवर्चलादिचूर्णम् | ५०३ | मूत्रकृच्छ्राश्मर्यादिचिकित्सनम् | ५२३ |
| मुस्तादिचूर्णम् | ५०४ |
पृष्ठ 39स्थायी लिंक
[ २१ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| पाषाणभेदीरसः | ५२६ | सञ्जीवन रसः | ५५१ |
| द्वितीयपाषाणभेदीरसः | ५२७ | मेहमर्दनरसः | ५५२ |
| गोक्षुरादिचूर्णम् | ५२८ | रामबाणरसः | ५५३ |
| त्रिविक्रमरसः | ,, | राजमृगाङ्करसः | ५५५ |
| आनन्दभैरवी वटी | ५२९ | मेहहररसः | ५५७ |
| अश्मरीहरयोगः | , | उदयभास्कररसः | ५५८ |
| यवक्षारप्रयोगः | ५३० | हिमांशुरसः | ५६० |
| हरिद्राप्रयोगः | ,, | वसन्तकुसुमाकररसः | ५६१ |
| शिवोक्तयोगः | ,, | सर्वमेहान्तकरसः | ५६३ |
| लघुलोकेश्वररसः | , | मेहारिरसः | ,, |
| सामान्योपायः | ५३१ | मेहबद्धरसः | ५६६ |
| गोक्षुरप्रयोगः | ,, | हरिशङ्कररसः | ,, |
| पाण्डूरादियोगः | ,, | वङ्गेश्वरो रसः | ५६७ |
| शुक्लपिण्याकादियोगः | ५३२ | गुडमार्कण्डी | ,, |
| मूत्रकृच्छ्रान्तको रसः | ,, | ताम्रयोगः | ५६८ |
| विदार्यादिकषायः | ,, | रक्तमेहे वङ्गप्रयोगः | ,, |
| क्षारप्रयोगः | ५३३ | शुक्रमेहे वङ्गप्रयोगः | ,, |
| प्रमेहः | ,, | मधुमेहे वङ्गप्रयोगः | ,, |
| चन्द्रप्रभावटी | ५३९ | शाल्मलिप्रयोगः | ५६९ |
| प्रमेहगजसिंहरसः | ५४० | रक्तमेहे बोलबद्धरसोपदेशः | ,, |
| महाविद्यागुटी | ५४१ | श्लेष्मातकक्वाथः | ,, |
| मेहध्वान्तविवस्वान् रसः | ५४२ | कुष्माण्डस्वरसप्रयोगः | ,, |
| उमाशम्भुरसः | ५४४ | स्त्रीणांरक्तस्रावे तौवरयोगः | ५७० |
| रसेन्द्रनागरसः | ५४६ | मेहकुठारो रसः | ,, |
| अष्टादशोऽध्यायः । | |||
| मेहशत्रुरसः | ५४७ | विद्रधिः | ५७१ |
| कासीसबद्धरसः | ५४८ | सर्वेश्वरपोटलीरसः | ५७२ |
| भोमपराक्रमरसः | ५५० |