रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)
Rasaratna Samuchchaya Hindi
रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री) द्वारा
स्रोत: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (उद्गम)
DevanagariHindipublished362 पृष्ठ
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| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| उदावर्त्तहरघृतम् | ४७७ | सामान्योपायाः | ५०४ |
| अतिसारः | ४७९ | वह्यादिचूर्णम् | ,, |
| दर्दुररसः | ४८० | दग्धशम्बूकादियोगः | ,, |
| द्वितीयदर्दुररसः | ४८१ | अन्योपायः | ५०५ |
| आनन्दभैरवरसः | ,, | अजीर्णम् | ,, |
| सुधासाररसः | ४८२ | अजीर्णकण्टकरसः | ५०६ |
| रसोत्तमः | ४८४ | विध्वंसरसः | ,, |
| स्वेदनीयन्त्रलक्षणम् | ४८५ | विसूचीविजयरसः | ५०७ |
| लोकेश्वररसः | ,, | अग्निकुमाररसः | ,, |
| लोकनाथरसः | ४८६ | वडवाग्निरसः | ५०८ |
| नागसुन्दररसः | ,, | वैश्वानरपोटलीरसः | ५०९ |
| षणिष्कतैलम् | ४८८ | चराचरवटी लक्षणम् | ५१० |
| सङ्ग्रहणी | ४८६ | श्रेष्ठमध्यमाधमवराटिकायालक्षणम् | ५११ |
| वज्रकपाटरसः | ,, | पुंवराटलक्षणं तस्य दोषाश्च | ,, |
| अग्निकुमाररसः | ४९० | वडवामुखी गुटी | ,, |
| कनकसुन्दररसः | ४९१ | क्रव्यादरसः | ५१२ |
| ग्रहणीहररसः | ४९२ | राजशेखरवटी | ५१४ |
| चण्डसङ्ग्रहगदैककपाटरसः | ,, | अग्निकुमाररसः | ५१५ |
| लघुसिद्धाभ्रकरसः | ४९३ | अमृतवटी | ५१६ |
| सर्वरोगरसः | ४९४ | राक्षसनामारसः | ५१७ |
| ग्रहणीगजकेसरीरसः | ४९७ | जीवननामारसः | ५१८ |
| शीघ्रप्रभावरसः | ४९९ | वडवानलरसः | ५१९ |
| पोट्टलीरसः | ५०० | अग्निजननीवटी | ५२० |
| वह्निज्वालावटोरसः | ५०१ | सर्वरोगान्तका वटी | ,, |
| वज्रधररसः | ५०२ | सामान्योपायः | ५२१ |
| ग्रहणीकपाटरसः | ,, | सप्तदशोऽध्यायः । | |
| सौवर्चलादिचूर्णम् | ५०३ | मूत्रकृच्छ्राश्मर्यादिचिकित्सनम् | ५२३ |
| मुस्तादिचूर्णम् | ५०४ |