रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)
Rasaratna Samuchchaya Hindi
रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री) द्वारा
स्रोत: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (उद्गम)
DevanagariHindipublished362 पृष्ठ
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| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| पाषाणभेदीरसः | ५२६ | सञ्जीवन रसः | ५५१ |
| द्वितीयपाषाणभेदीरसः | ५२७ | मेहमर्दनरसः | ५५२ |
| गोक्षुरादिचूर्णम् | ५२८ | रामबाणरसः | ५५३ |
| त्रिविक्रमरसः | ,, | राजमृगाङ्करसः | ५५५ |
| आनन्दभैरवी वटी | ५२९ | मेहहररसः | ५५७ |
| अश्मरीहरयोगः | , | उदयभास्कररसः | ५५८ |
| यवक्षारप्रयोगः | ५३० | हिमांशुरसः | ५६० |
| हरिद्राप्रयोगः | ,, | वसन्तकुसुमाकररसः | ५६१ |
| शिवोक्तयोगः | ,, | सर्वमेहान्तकरसः | ५६३ |
| लघुलोकेश्वररसः | , | मेहारिरसः | ,, |
| सामान्योपायः | ५३१ | मेहबद्धरसः | ५६६ |
| गोक्षुरप्रयोगः | ,, | हरिशङ्कररसः | ,, |
| पाण्डूरादियोगः | ,, | वङ्गेश्वरो रसः | ५६७ |
| शुक्लपिण्याकादियोगः | ५३२ | गुडमार्कण्डी | ,, |
| मूत्रकृच्छ्रान्तको रसः | ,, | ताम्रयोगः | ५६८ |
| विदार्यादिकषायः | ,, | रक्तमेहे वङ्गप्रयोगः | ,, |
| क्षारप्रयोगः | ५३३ | शुक्रमेहे वङ्गप्रयोगः | ,, |
| प्रमेहः | ,, | मधुमेहे वङ्गप्रयोगः | ,, |
| चन्द्रप्रभावटी | ५३९ | शाल्मलिप्रयोगः | ५६९ |
| प्रमेहगजसिंहरसः | ५४० | रक्तमेहे बोलबद्धरसोपदेशः | ,, |
| महाविद्यागुटी | ५४१ | श्लेष्मातकक्वाथः | ,, |
| मेहध्वान्तविवस्वान् रसः | ५४२ | कुष्माण्डस्वरसप्रयोगः | ,, |
| उमाशम्भुरसः | ५४४ | स्त्रीणांरक्तस्रावे तौवरयोगः | ५७० |
| रसेन्द्रनागरसः | ५४६ | मेहकुठारो रसः | ,, |
| अष्टादशोऽध्यायः । | |||
| मेहशत्रुरसः | ५४७ | विद्रधिः | ५७१ |
| कासीसबद्धरसः | ५४८ | सर्वेश्वरपोटलीरसः | ५७२ |
| भोमपराक्रमरसः | ५५० |