रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)
Rasaratna Samuchchaya Hindi
रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री) द्वारा
स्रोत: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (उद्गम)
DevanagariHindipublished362 पृष्ठ
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| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| जातिभेदेनाधिकारीभेदकथनम् | १४१ | रत्नभस्मक्रमः | १४८ |
| वर्णभेदेनाधिकारीभेदकथनम् | ,, | रत्नानां द्रावणम् | ,, |
| वज्रगुणाः | ,, | मुक्ताद्रावणे विशेषक्रमः | ,, |
| रत्नदोषाः | १४२ | वज्रद्रावणविशेषविधिः | १५० |
| वज्रशोधनम् | ,, | वैक्रान्तद्रावणे विशेषक्रमः | ,, |
| वज्रमारणम् | ,, | अन्यविधिः | ,, |
| मतान्तरेण मारणम् | ,, | अन्यविधिः | ,, |
| मतान्तरेण मारणम् | १४३ | राजावर्त्तः | १५१ |
| मतान्तरेण मारणम् | १४४ | उत्तममध्यमराजावर्त्तलक्षणम् | ,, |
| प्रयोगविशेषेण गुणविशेषकथनम् | ,, | गुणाः | ,, |
| वज्ररसायनम् | ,, | राजावर्त्तादिसामान्यशोधनम् | ,, |
| नीलनिरूपणम् | १४५ | राजावर्त्तशोधनम् | ,, |
| नीलभेदाः | ,, | राजावर्त्तमारणम् | ,, |
| जलशक्रनीलयोः स्वरूपम् | ,, | सत्त्वपातनम् | १५२ |
| गुणाः | ,, | द्रुतीनां दीर्घकालरक्षणोपायः | ,, |
| गोमेदः | १४६ | रत्नधारणगुणाः | ,, |
| गोमेदर्निरुक्तिः | ,, | गैरिकम् | ,, |
| प्रशस्तगोमेद लक्षणम् | ,, | गैरिकस्य शोधनं सत्त्वपातनञ्च | ,, |
| हेयगोमेदलक्षणम् | ,, | पञ्चमोऽध्यायः । | |
| गुणाः | ,, | लोहानि | १५३ |
| रत्नमारणनिषेधः | ,, | लोहजातिपरिगणनम् | ,, |
| रत्नप्रयोगः | १४७ | स्वर्णम् | १५४ |
| रत्नानां साधारणशोधनम् | ,, | स्वर्णभेदाः | ,, |
| वैदूर्यम् | ,, | प्राकृतस्वर्णस्योत्पत्तिः | ,, |
| श्रेष्ठवैदूर्यलक्षणम् | ,, | सहजस्वर्णोत्पत्तिः | ,, |
| हेयवैदूर्यलक्षणम् | ,, | वह्निजस्वर्णोत्पत्तिः | ,, |
| गुणाः | ,, | स्वर्णत्रयगुणाः | १५५ |
| रत्नशुद्धिः | ,, |