रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)
Rasaratna Samuchchaya Hindi
रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री) द्वारा
स्रोत: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंतृतीयोऽध्यायः । १०३
२ सुवर्णमाक्षिक ( Copper pyrites ) ताम्रमाक्षिक । ३ कांस्यमाक्षिक ( Arseno pyrites ) तालमाक्षिक । ४ कान्तमाक्षिक ( Pyrrhotite ) चुम्बकीय लौहमाक्षिक । ५ विमल ( Marcasite pyritous ) लौहमाक्षिक ( विशिष्टरूप युक्त ) । ६ गन्धनाग ( Galena ) नीलाञ्जन । ७ गन्धयशद् Zinc blende ) यशद् का खनिज । ८ गन्धबरनाग ( Stibnite ) । ९ गन्धरजत ( Argentite ) रजतखनिज । १० हिङ्गुल ( Cinnabar ) पारद का खनिज । ११ गोदन्ती ( Gypsum ) गन्धक का खनिज । १२ बेरिया सल्फेट ( Heavy spar ) बराइट । १३ बोर्नाइट ( Bornite ) पाषाणस्वरूप ताम्रमाक्षिक ।
उक्त खनिजों की मात्रा किसी किसी स्थान पर बहुत व्यापक और बड़ी तादाद में पाई जाती है । स्वतन्त्र तथा अन्य खनिजों के साथ मिला हुआ गन्धक प्रायः पृथिवी के सर्वांश में पाया जाता है ।
वनस्पतियों में भी नीचे लिखे गणों में प्रायः गन्धक मिला रहता है:— राईवर्ग, गाजरवर्ग, लहसुनवर्ग, इनके रस और बीजों के तैल में सल्फेट ( Sulphate ) और सल्फाइड ( Sulphide ) के रूप में गन्धक पाया जाता है ।
प्राणि वर्ग में भी यह रक्तादि धातुओं में अत्यल्प प्रमाण से मिला रहता है । पित्त में २६ फी सदी गन्धकांश गन्धक के तेजाब ( Hydro chloric acid ) के रूप में विद्यमान है ।
प्रकृति में अनेक प्रकार की रासायनिक प्रतिक्रियाओं से गन्धक पैदा होता है । माक्षिक के आक्सिडेशन से भी गन्धक पृथक् होकर जहां माक्षिक के कण घुले रहते हैं, वहां पर के कोष्ठों में जमा पाया जाता है । जहां पर ज्वालामुखी की कन्दराओं से अनेक प्रकार की गन्धकीय गैसें ऊपर की ओर निकलती हैं वहां पर 'सल्फर डाई औक्साइड' और हाइड्रोजन सल्फाईड की प्रतिक्रिया से गन्धकाम्ल और गन्धक उत्पन्न होता है ।
( H₂ S हाइड्रोजन सल्फाइड × ₂ So ₂ सल्फर डाइ आक्साइड H ₂ So 4 गन्धकाम्ल और 2S गन्धक ) कहीं २ सम्भवतः हाइड्रोजन सल्फाइड और आक्सिजन की अपूर्ण प्रति क्रिया से गन्धक बनता है । ( ₂ H ₂ So हाइड्रोजन सल्फाइड + O ₂ आक्सिजन की प्रतिक्रिया से ₂ H ₂ o जल और ₂ S गन्धक) अथवा सल्फर डाइ ओक्साइड और जल की प्रतिक्रिया से गन्ध काम्ल और गन्धक