भारतकोश
रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

Rasaratna Samuchchaya Hindi

रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री) द्वारा

स्रोत: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (उद्गम)

DevanagariHindipublished362 पृष्ठ

पृष्ठ 217, कुल 362 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 217

तृतीयोऽध्यायः । १२७

**विमर्शः—**यह भी आजकल के वैज्ञानिकों के मत से खनिज द्रव्य नहीं है । किन्तु हिमालय की वनस्पतियों के फलों पर जमने वाला ( होने वाला ) रज ( चूर्ण ) है ।

अथ गुणाः— पित्तव्रणाध्मानविबन्धहारी श्लेष्मोदरार्तिकृमिगुल्महारी ।
मूलामशोफज्वरशूलहारी कम्पिल्लको रेच्यगदापहारी ॥ १२६ ॥

यह पित्त, व्रण, आध्मान और मलावरोध को नष्ट करता है और कफ, उदररोग ( जलोदरादि ), कृमि, गुल्म, अर्श, आमदोष, सूजन, ज्वर, शूल इनको नष्ट करता है और विरेचन के योग्य रोगों को नष्ट करता है ॥ १२९ ॥

इति कम्पिल्लाधिकारः—

अथ गौरीपाषाणः । गौरीपाषाणकः पीतो विकटो हतचूर्णकः ।
स्फटिकाभश्च शङ्खाभो हरिद्राभस्त्रयः स्मृताः ॥ १३० ॥

गौरीपाषाण ( सङ्खिया ) के पीत, विकट और हतचूर्णक ये तीन पर्याय हैं । और यह तीन प्रकार का होता है । एक स्फटिक समान श्वेत, दूसरा शङ्खसमान धूसर, तीसरा हल्दी के समान पीला होता है ॥ १३० ॥

**विमर्शः-**गौरीपाषाण (सङ्खिया) को आर्सेनिक ( Arsenic ) कहते हैं । इसका सङ्केत As तथा परमाणुभार ७५ है । यह स्वतन्त्र रूप से कम मिलता है । प्रायः अन्य खनिजों के साथ मिलता है । यह रक्त सल्फाइड ( As 2 S 3 ) अर्थात् मैन्सील और पीत सल्फाइड ( As 2 S 3 ) अर्थात् हरताल के रूप में बहुत प्राचीन समय ही से ज्ञात था । पश्चिमोत्तर सीमाप्रान्त के चित्रल स्थान में खानों से बहुत हरिताल निकलता था । चीन के यूनान प्रान्त से बहुत सल्फाइड आता था और बर्मा वालों के द्वारा वार्निश बनाने में प्रयुक्त होता था । धातुओं के साथ आर्सेनाइड के रूप में यह बहुत फैला हुआ पाया जाता है । इसका सब से महत्त्व का खनिज आर्सेनिकल पायराइटीज़ ( Fe As S ) है जो आयर्न पायराइटीज़ और अन्य सल्फाइडू खनिजों के साथ मिला हुआ पाया जाता है । गन्धकाम्ल के निर्माण में जब आयर्न पायराइटीज् जलाया जाता है तब आर्सेनिक भी आक्सी कृत हो बाष्पशील आर्सेनिक आक्साइड बन कर भट्ठी से निकली उष्ण गैसों के साथ निकल कर नल में जो धूल इकट्ठी होती है उसमें वह विद्यमान रहता है । इस आक्साइड् को 'सोमल' कहते हैं इसी से आर्सेनिक के यौगिक तय्यार होते हैं ।