रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)
Rasaratna Samuchchaya Hindi
रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री) द्वारा
स्रोत: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंपञ्चमोऽध्यायः । १५३
अथ गैरिकम्–गैरिकस्य शोधनं सत्त्वपातनञ्च— अनेन क्रमयोगेन गैरिकं विमलं भवेत् । क्रमात् पीतञ्च रक्तञ्च सत्त्वं पतति शोधनम् ॥ ८४ ॥
इति श्री वैद्यपतिसिंहगुप्तस्य सूनोर्वाग्भट्टाचार्यस्य कृतौ रसरत्नसमुच्चये रत्नानां शुद्ध्यादिनिरूपणं नाम चतुर्थोऽध्यायः ॥ ४ ॥
इसी तरह गैरिक की शुद्धि और सत्त्वपातन भी होता है। पाषाणगैरिक का सत्त्व पीतवर्ण और स्वर्ण गैरिक का सत्त्व लाल वर्ण का होता है ॥ ८४ ॥
इति श्रीकृष्णात्मजेन पण्डितप्रवरेण श्रीअम्बिकादत्तशास्त्रिणा विरचितायां रसरत्नसमुच्चयस्य रत्नोज्ज्वलाख्य-भाषाटीकायामुपरस- साधारणरसनिरूपणं नाम चतुर्थोऽध्यायः ।
अथ पञ्चमोऽध्यायः ।
अथ लोहानि–लोहजातिपरिगणनम्— शुद्धं लोहं कनकरजतं भानुलोहाश्मसारम् । पूतीलोहं द्वितयमुदितं नागवङ्गाभिधानम् । मिश्रं लोहं त्रितयमुदितं पित्तलं कांस्यवर्तम् । धातुर्लोहे लुह इति मतः सोऽप्यनेकार्थवाची ॥ १ ॥
जिन खनिज धातुओं के लिये लोह शब्द का प्रयोग होता है वे लोह धातु तीन प्रकार की होती हैं, जैसे १ शुद्ध लोह, २ पूति लोह, ३ मिश्रलोह, सोना, चांदी, ताम्बा और लोहा ( मुण्ड, तीक्ष्ण, कान्त ) ये चार शुद्ध लोह हैं और नाग ( सीस ), वङ्ग ( राङ्गा ) ये दोनों पूती लोह हैं और पित्तल, कांसो, भरत या