रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)
Rasaratna Samuchchaya Hindi
रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री) द्वारा
स्रोत: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (उद्गम)
DevanagariHindipublished362 पृष्ठ
पृष्ठ 49, कुल 362 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 49
[ ३१ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| कर्णरोगहरी वज्रादिवटिका | ८४६ | धातुबद्दरसगुटिका | ८५३ |
| कर्शामयघ्नतैलम् | ” | महासरस्वतीचूर्णम् | ८५५ |
| क्रिमिकर्णारितैलम् | ८४७ | मुखरोगादिगलगण्डमालारोगाणां सामान्योपायाः | ” |
| सामान्योपायाः | ” | गलकीलके आमलकप्रयोगः | ” |
| कर्णशूले लवणाद्रकप्रयोगः | ” | विषतिन्दुकादि वटी च | ” |
| कर्णशूले तिलपर्णीप्रयोगः | ” | गलकीलके सैन्धवप्रयोगः | ८५६ |
| अर्कपत्रप्रयोगः | ” | गलकीलके भल्लातकप्रयोगः | ” |
| लशुनरसप्रयोगः | ” | दन्तदार्ढ्यंकरोजिह्वापूतिगन्धहरश्च जयाप्रयोगः | ” |
| पूयहरो मेघनाद स्वरसः | ८४८ | मुखपाके पर्पटीरसः | ” |
| बाधिर्यहरं रुषल्यादिचूर्णम् | ” | मुखशोषे महाराष्ट्री गुटिका | ८५७ |
| कर्णमूलस्फोटहरः केतकादिलेपः | ” | सामान्योपायाः | ” |
| कर्णगलादिस्फोटहरः पुत्रजीवलेपः | ” | मुखवैवर्ण्ये पुनर्नवायुद्वर्तनम् | ” |
| गोमक्षिकानिःसारणार्थं तगरचर्वणादिकम् | ” | नीलिकायां रजन्यादिलेपः | ” |
| कर्णपालीवर्धको मुषलीप्रयोगः | ८४९ | मुखवैवर्ण्ये वङ्गभस्मप्रयोगः | ८५८ |
| कर्णवर्धकचर्मचेटप्रयोगः | ” | मुखवैवर्ण्यदौ मातुलुङ्गादिप्रलेपः | ” |
| कर्णवृद्धिकरोवराहतैलप्रलेपः | ” | मञ्जिष्ठादिप्रलेपः | ” |
| नासारोगाः | ८५० | मुखदौर्गन्ध्यनाशिनी कुष्ठादिवटी | ” |
| मणिपर्पटीरसः | ” | मुखदौर्गन्ध्ये गृहधूमक्वाथः | ८५९ |
| पूयास्रलक्षणम् | ८५१ | मुखदौर्गन्ध्ये पथ्यादि वटिका | ” |
| सामान्योपायः | ” | मुखवैरस्ये लाजादिचूर्णम् | ” |
| कुङ्कुमादिनस्यम् | ८५२ | उपजिह्वायां निर्गुण्ड्यादियोगः | ” |
| कामलाहराञ्जनम् | ” | कृमिदन्ते अभयादिगुटिका | ८६० |
| कामलाहरमञ्जनान्तरम् | ” | कृमिदन्ते वासीसादिगुटिका | ” |
| मुखरोगः | ” | कृमिदन्ते विशालाधूमः | ” |
| मुखरोग-चिकित्सा | ८५३ | चलदन्ते जात्यादिदन्तधावनम् | ” |
| ताप्यादिवटी | ” |