रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)
Rasaratna Samuchchaya Hindi
रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री) द्वारा
स्रोत: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (उद्गम)
DevanagariHindipublished362 पृष्ठ
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| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| कान्तरसायनम् | ९३६ | उमापतिरसः | ९५९ |
| अन्यत् त्रिफलारसायनम् | ९३७ | महाकनकसुन्दररसः | ९६० |
| द्वितीयकान्तरसायनम् | ९३८ | अमृतार्णवरसः | ९६१ |
| तृतीयकान्तरसायनम् | ” | मदनसञ्जीवनरसः | ९६४ |
| कान्ताभ्रकरसायनम् | ९३९ | पुष्पधन्वारसः | ९६५ |
| पाठादिघृतम् | ९४० | रसेन्द्रचूडामणिः | ९६६ |
| ताप्यादिवटकः | ” | पूर्णचन्द्ररसः | ९६८ |
| कमलाविलासरसः | ९४१ | महाकल्कः | ” |
| लक्ष्मीविलासरसः | ९४२ | मदनमोदकः | ९७२ |
| सौश्रुतनारिकेलप्रयोगः | ९४३ | कामेश्वरमोदकः | ९७३ |
| सप्तविंशोऽध्यायः । | वाजीकरणे सामान्योपायाः | ९७४ | |
| वाजीकरणम् | ९४५ | मधुकप्रयोगः | ” |
| वाजीकरणगुणाः | ” | शृङ्गीप्रयोगः | ९७५ |
| वाजीकरणस्य निरुक्तिः | ” | स्वयङ्गुप्तादिचूर्णंम् | ” |
| शुक्रक्षयस्य निदानम् | ” | तिलप्रयोगः | ” |
| वाजीकरणयोगादेशे प्रतिज्ञा | ” | सिन्दूररसः | ” |
| वाजीकरणप्रयोगे पूर्वकृत्यम् | ९४६ | कार्य्यहरयोगः | ९७६ |
| कामकलाख्यरसः | ” | कार्य्यहरयोगत्रयम् | ” |
| कामदेवरसः | ९४७ | लिङ्गलेपाः, द्रावणश्च | ९७७ |
| मदनसुन्दररसः | ९४८ | द्रावणे सूतप्रयोगः | ” |
| पूर्णचन्द्ररसः | ९४९ | सिन्दूरमधुलेपः | ” |
| मदनसुन्दररसः | ” | स्तम्भने कुकवाकुप्रयोगः | ” |
| कुसुमायुधः | ९५१ | कर्पूरादिप्रलेपः | ९७८ |
| सूतेन्द्ररसः | ९५३ | पुण्डरीकप्रयोगः | ” |
| मदनकामदेवरसः | ९५४ | मदनजीवनः | ” |
| कामधेनुरसः | ९५६ | अष्टविंशोऽध्यायः । | |
| महाभ्रसत्त्वम् | ९५८ | लोहकल्पः | ” |