रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)
Rasaratna Samuchchaya Hindi
रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री) द्वारा
स्रोत: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (उद्गम)
DevanagariHindipublished362 पृष्ठ
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| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| रसस्य प्राधान्यकीर्तनम् | ९७९ | प्रथमद्वितीयलोहकल्पौ | ९९६ |
| रसभेदाः | ,, | तृतीयलौहकल्पः | ,, |
| पानीयकषायविधिः | ,, | चतुर्थोलौहकल्पः | ९९७ |
| स्वर्णरौप्यशोधनम् | ,, | पञ्चमो लौहकल्पः | ,, |
| ताम्रशोधनम् | ,, | षष्ठलौहकल्पः | ,, |
| वङ्गनागयोः शोधनम् | ९८० | शूले सप्तमलौहकल्पः | ९९८ |
| कान्तलौहस्य लक्षणम् | ,, | जीर्णज्वरादौ अष्टमोलौहकल्पः | ,, |
| कान्तलौहस्य शोधनम् | ,, | क्षयादौनवमो लौहकल्पः | ९९९ |
| धातूनां सामान्यमारणम् | ९८१ | विविधरोगे दशमोलौहकल्पः | ,, |
| स्वर्णमारणम् | ,, | यक्ष्मादौ एकादशोलौहकल्पः | ,, |
| रौप्यताम्रमारणम् | ,, | गरादौ द्वादशत्रयोदशलौहकल्पौ | १००० |
| वङ्गसीसकमारणम् | ८२९ | अम्लपित्तादौ चतुर्दशोलौहकल्पः | ,, |
| सीसकस्यमारणान्तरम् | ,, | ग्रहण्यादौ पञ्चदशो लौहकल्पः | ,, |
| लौहमारणम् | ९८३ | सर्वरोगेषु षोडशो लौहकल्पः | १००१ |
| असम्यङ्मारितलौहस्यलक्षणम् | ,, | कुष्ठे सप्तदशो लौहकल्पः | १००२ |
| निरुत्थलौहस्य लक्षणम् | ,, | मेदः प्रभृतिरोगेषु अष्टादशोलौहकल्पः | ,, |
| निरुत्थलौहस्य परीक्षा | ९८४ | कुष्ठे एकोनविंशो लौहकल्पः | ,, |
| अनिरुत्थलौहस्य मारणम् | ,, | सर्वरोगेषु विशतितमो लौहकल्पः | ,, |
| मृत्युहारी रसः | ,, | नेत्ररोगे कान्तनागाख्येकविंशलोहकल्पः | ,, |
| लोहकल्पः | ९८६ | रसायने द्वाविंश लौहकल्पः | १००४ |
| लोहमारणप्रकारः | ९८७ | अरिष्टलक्षणे त्रयोविंश लौहकल्पः | ,, |
| लोहकल्पः | ९८८ | जरादौ चतुर्विंश लौहकल्पः | ,, |
| लोहकल्पे दन्त्यादिगणः | ९९४ | पञ्चविंशादिलौहकल्पचतुष्टयम् | ,, |
| ताम्रद्रुतिसंज्ञको लोहकल्पः | ,, | रसायने षड्विंश लौहकल्पः | १००५ |
| क्षयादौ खण्डखाद्याख्यो लोहकल्पः | ९९५ | मृतलौहानां रसस्वकथनम् | ,, |
| धातुभस्मनां पृथक्पृथक् तत्तद्रोगेषु प्रयोगः | ९९६ |