रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)
Rasaratna Samuchchaya Hindi
रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री) द्वारा
स्रोत: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (उद्गम)
DevanagariHindipublished362 पृष्ठ
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७ विद्याधर ( ऊर्ध्वपातन ) यन्त्र वर्णनम्—
यन्त्रं विद्याधरं ज्ञेयं स्थालीद्वितयसम्पुटात ।
चुल्लीं चतुर्मुखीं कृत्वा यन्त्रभाण्डं निवेशयेत् ॥ १ ॥
तत्रौषधं विनिक्षिप्य निरुन्ध्याद्भाण्डकाननम् ।
यन्त्रं विद्याधरं नाम तन्त्रज्ञैः परिकीर्तितम् ॥ २ ॥
रसरत्नसमुच्चयः ।
समानाकार दो मिट्टी के भाण्डों को परस्पर मिलाने को विद्याधर यन्त्र कहते हैं ।
**विधि:--**एक चारमुख वाला चूल्हा बनाकर उसपर औषधादिक से भरा हुआ एक मिट्टी का भाण्ड रखना चाहिए । फिर इस भाण्ड के मुखपर एक ऊर्ध्वमुख वाला दूसरा भाण्ड रखकर नीचे के भाण्ड के मुख को ऊपरी भाण्ड के तल के