भारतकोश
रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

Rasarnava: Tantric Chemistry and Alchemy with Commentary

शिव-पार्वती संवाद (सम्पादक: प्रफुल्लचन्द्र राय एवं हरीशचन्द्र कविराज) द्वारा

DevanagariHindipublished558 पृष्ठ

पृष्ठ 125, कुल 558 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 125

१०२ रसार्णवे गुड़ाभो मध्यमो ज्ञेयः पाषाणाभः कनिष्ठकः¹ ॥ २९ ॥ कटुकालाबुनिर्यासैनालोड्य² रसकं पचेत् । शुद्धो दोषविनिर्मुक्तः³ पीतवर्णस्तु जायते⁴ ॥ ३० ॥ किमत्र चित्रं रसकं⁵ रसेन रजस्वलायाः कुसुमेन⁶ भावितम् । क्रमेण कृत्वा उरगेन⁷ रञ्जितं करोति शुक्लं त्रिपुटेन⁸ काञ्चनम् ॥ ३१ ॥ ध्रीयते नापि वह्निस्थः सत्त्वरूपो महाबलः ॥ ३२ ॥⁹ रसकं चूर्णयित्वा तु बद्धा वस्त्रे विचक्षणः । मूत्रे निधापयेत् स्त्रीणां सप्तरात्रं सुरेश्वरि ॥ ३३ ॥ पुष्पाणां रक्तपीतानां रसैः पत्रैश्च¹⁰ भावयेत् ॥ ३४ ॥ (1) K reads कनिष्टकः. M reads कनिष्ठिकः. Both are incorrect. (2) B has निर्यासै चालोद्य. M has निर्यासै चालोध्या. Both are incorrect. (3) K reads दोषः विनिर्मुक्तः. M reads विनिर्मुक्तो. Both are gram. inc. (4) पीतवर्णसु जायते, a variant in K, which seems to be an error of the scribe. जायते पीतवर्णकः, a variant in M. [Vide रस.स. Chap. II. vs. 153-154.] (5) M reads रसको. [The term रसक is of both genders.] (6) M reads रजस्वलाया ऋतुजेन. (7) K reads तुरगेण. [Both उरग (lead) and तुरग (sulphur) are mentioned in रसचिन्तामणि, Chap. 3.] (8) M has समं त्रिपुटेन. (9) This hemistich is not found in B and M. After this 32nd śloka we find चण्डश्च in K only; hence we have not inserted it in the text. It appears to be redundant. (10) B reads पचैश्च, which is evidently an error of the scribe. K reads पिष्टैश्च, which is also incorrect, as the पिष्ट of flowers is unusual.