भारतकोश
रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

Rasarnava: Tantric Chemistry and Alchemy with Commentary

शिव-पार्वती संवाद (सम्पादक: प्रफुल्लचन्द्र राय एवं हरीशचन्द्र कविराज) द्वारा

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" is the standard phrase everywhere: "सिन्दूरारुणसन्निभम्" (resembling the reddish color of sindura). But the print might have dropped a 'न', looking like सविभम् or it's सन्निभम् where the double 'न' is compacted. Let's look at it: it has , then a letter with ि matra, then भम्. It really looks like सविभम् in print, a known typographical error for सन्निभम्).

Line 15: तद्भस्म पलमात्रं तु सिद्धाभ्राख्यसंयुतम् ।

Line 16: लिह्यादेनं सप्तवारं क्षीराहारो जितेन्द्रियः ॥ ८० ॥ (Wait, or लिह्याद्देवं? In print, it looks like लिह्यादेवं - wait! "लिह्यादेवं" = लिह्यात् + एवम्! "Thus one should lick it seven times"! YES! "एवं"! "लिह्यादेवं"! Look: "लिह्याद्" + "एवं" = "लिह्यादेवं"! That's why it is 'दे' and 'वं': लि - ह्या - दे - वं = लिह्यादेवं! Brilliant! "लिह्यादेवं सप्तवारं क्षीराहारो जितेन्द्रियः ॥ ८० ॥" "लिह्याद् एवम्"

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