भारतकोश
रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

Rasarnava: Tantric Chemistry and Alchemy with Commentary

शिव-पार्वती संवाद (सम्पादक: प्रफुल्लचन्द्र राय एवं हरीशचन्द्र कविराज) द्वारा

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न्यस्तव्या वीरवन्दिते⁵ ॥ २५ ॥Wait, look at footnote 5:(5) गुलस्य कालरात्रिसु व्यन्तव्या वीरवन्दिता, a variant in M, which is inc.Wait, in : Is itगुड़स्यorगुडस्य? Look at : गुडस्यorगुड़स्य? The bottom of has a dot:गुड़स्य. And look at कालरात्रिसु: In , is it कालरात्रिसुorकालरात्रिश्चorकालरात्रिस्तु? Wait! Look at after कालरात्रि: Is it सु? Wait! Look at कालरात्रिसुin and ! In :गुलस्य कालरात्रिसु! It is clearly कालरात्रिसु! And in : कालरात्रिसु! Wait, in : न्यस्तव्या वीरवन्दिते⁵ ॥ २५ ॥`

Now let's check : त्रिकूटाक्षं त्रिनेत्रं तु⁶ अनलस्य तु विन्यसेत्⁷ । Footnote 6: `(6) K reads त्रिकूटाक्षचिनेत्रं च. M reads त्रिघण्टाख्यात्रिकीये