भारतकोश
रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

Rasarnava: Tantric Chemistry and Alchemy with Commentary

शिव-पार्वती संवाद (सम्पादक: प्रफुल्लचन्द्र राय एवं हरीशचन्द्र कविराज) द्वारा

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पञ्चमः पटलः । ५७ सर्पाक्षो वङ्गिकर्कोटो¹ कञ्चुको जलबिन्दुजा² । शतावरी भृङ्गराजः³ शरपुङ्खा⁴ पुनर्नवा ॥ २ ॥ मण्डूकपर्णी⁵ मत्स्याक्षो ब्रह्मदण्डी शिखण्डिनी⁶ । अनन्ता काकजङ्घा च काकमाची⁷ कपोतिका⁸ ॥ ३ ॥ विष्णुक्रान्ता सहचरा⁹ सहादेवी¹⁰ महाबला । बला नागबला कृष्णा¹¹ चक्रमर्दः कुरुण्टिणो¹² ॥ ४ ॥ पाठा चामलको नीलो¹³ ज्वालिनी पद्मचारिणी । फणिनिजिह्वा गोजिह्वा¹⁴ कोकिलाक्षो¹⁵ घनध्वनिः¹⁶ ॥५॥ (1) K reads वङ्गिकाकौटो. M reads वङ्गिकाकोटो. (2) B reads कंचुको जलबिन्दुका. K reads कंचुकि जलचिंचिका. M reads कञ्चकौ जालबिम्बिका. (3) M reads भङ्गराजी. (4) B reads शरपुङ्गी. (5) K has मंडूकपर्णि (without विसर्ग). (6) K has शिखंडिनि, which is gram. inc. (7) . B reads काचमाची, which is not accurate. K reads only माचि. (8) B reads कपोतको. K reads कपोतिका तथा. M reads कपोतका. (9) K reads सहसा च. (10) K and M have सहदेवी. (11) B and K read मूर्वा. But this is a tautology : since we see afterwards ज्वालिनी meaning मूर्वा. (12) चक्रमर्दकुरुण्टिणी, a variant in B. चक्र- मर्दककिंटिणी, a variant in M. (13) K has चामलकि नौलि, which is gram. inc. (14) B reads घंटिनिजिह्वा गांजिह्वा. K reads गोजिह्निका विजिह्वा च. (15) K reads erroneously कोकोलाक्षा. M reads कोकिलाक्षा. (16) B has घनध्वनिः, which is incorrect. K has घनध्वनी, which is also incorrect. M has घनाघना (which means काकमाची), which has been already mentioned. • ४