भारतकोश
रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary

सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा

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३२२ रसतरङ्गिणी खार आधा तोला, शुद्ध पुष्पकासीस आधा तोला, पीपलवृक्ष की त्वचा का क्षार दो मासा लेकर, इन सब को एकत्र अच्छी तरह मिला कर काँच की शीशी में रख लें । इसको टंकण मलहर कहते हैं । यह मरहम बिगड़े हुए फोड़ों को साफ करने में विशेष लाभदायक है ॥ ६६-६६ ॥ टङ्कणाम्लस्य नामानि टङ्काम्लष्टङ्कणाम्लश्च टङ्गाम्लष्टङ्गणाम्लकः । सुभगाम्लश्च कथितो रसतन्त्रविचक्षणैः ॥ १०० ॥ टंकाम्ल, टंकणाम्ल, टंगाम्ल, टंगणाम्लक, सुभगाम्लक, ये सब नाम टंक- णाम्ल (Boric acid) के हैं ॥ १०० ॥ टङ्कणाम्लस्य निर्माणप्रकारः चूर्णितं टङ्कचूर्णन्तु तदर्धेऽत्युष्णवारिणि । द्रावयित्वा प्रयत्नेन काचपात्रे निधापयेत् ॥ १०१ ॥ वह्नौ सन्ताप्य च ततो लवणद्रावकं क्षिपेत् । द्रावप्रक्षेपणादूर्ध्वं पात्रं भूमौ तु विन्यसेत् ॥ १०२ ॥ शीतीभूते तु सलिले शनैः खल्वपसारयेत् । पृथक् कुर्वीत टङ्काम्लं त्वधः पतितमुत्तमम् ॥ १०३ ॥ टङ्कणाम्लं पुनस्तूष्णे त्रिगुणे सलिले भिषक् । द्रावयित्वा पुनस्तद्वत् सलिले त्वपसारयेत् ॥ १०४ ॥ समाहरेत् टङ्कणाम्लं तलस्थमतिनिर्मलम् । संशोष्य च ततो वैद्यः प्रयोगेषु प्रयोजयेत् ॥ १०५ ॥ टङ्कणाम्लो नवीनपरिभाषानिर्दिष्टः—तदर्धे टङ्कणार्धे । लवणद्रावकं टङ्कण- चूर्णे बिन्दुशस्तावत् क्षेप्यं यावता सर्वं तलस्थं भवेत् । पुनर्विद्राव्य पाकः अत्यन्तनिर्मलतासम्पादनाय ॥ १०१-१०५ ॥ भा.टी.—सुहागे को चूर्ण करके उसके आधे भाग को गरम जल में डाल कर घोल बना कर एक काँच के पात्र में रख कर उसे आग पर रखकर तपायें और उसमें थोड़ा-थोड़ा बूँद करके लवणाम्ल डालें। जब सब टंकण पात्रतल में एकत्र हो जाय तब पात्र को नीचे उतार कर ठंडा होने को रख दें । अब ऊपर आये हुए जल को अलग करके नीचे रहे हुए टंकण को अलग कर लें । अब इस टंकणाम्ल को पुनः एक काँच पात्र में तिगुने गरम जल में घोल कर पुनः