रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)
Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary
सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ ३१ ] विषय पृष्ठ | विषय पृष्ठ द्वाविंश तरङ्ग | शोधन प्रकार ५७७ पित्तल का नाम ५६६ | द्वितीय शोधन ,, पित्तल का निर्माण ,, | तृतीय शोधन ५७८ ग्राह्य पित्तल ५७० | स्रोतोऽञ्जन का गुण ५७८ हेय पित्तल ,, | सौवीराञ्जन का गुण ,, पित्तल का शोधन ,, | स्रोत सौवीराञ्जन की मात्रा ५७६ पित्तल का द्वितीय शोधन ५७१ | पुष्पाञ्जन का परिचय ,, पित्तल मारण ,, | पुष्पाञ्जन का गुण ५८० पित्तल का द्वितीय मारण ,, | अञ्जन त्रितय का बाह्य प्रयोग ,, पित्तल का तृतीय मारण ५७२ | तिमिरहराञ्जन ,, पित्तल भस्म का गुण ,, | तुहिनाञ्जन ५८१ पित्तल भस्म की मात्रा ,, | शिलाजीत का नाम ,, पित्तल रसायन ५७३ | शिलाजीत का परिचय ५८२ कांस्य का नाम ,, | शिलाजीत के भेद ५८३ कांस्य का निर्माण ,, | शिलाजीत का स्वरूप ,, ग्राह्य कांस्य का लक्षण ,, | शिलाजीत शोधन ५८४ हेय कांस्य का लक्षण ५७४ | द्वितय शोधन ५८६ कांस्य शोधन ,, | तृतीय शोधन ,, कांस्य द्वितीय शोधन ,, | शुद्ध शिलाजीत की परीक्षा ५८७ कांस्य मारण ,, | शुद्ध शिलाजीत का गुण ५८८ द्वितीय मारण ५७५ | शिलाजीत की मात्रा ५६१ तृतीय मारण ,, | शिलाजीत का आमयिक प्रयोग ,, कांस्य भस्म का गुण ,, | गेरु का नाम ५६५ कांस्य भस्म का प्रयोग ,, | गेरु के दो भेद :• अञ्जन का नाम और भेद ५७६ | गेरु का स्वरूप ', स्रोतोऽञ्जन का नाम ,, | गेरु का शोधन ५६६ सौवीराञ्जन का नाम ५७७ | द्वितीय शोधन ,, स्रोतोऽञ्जन का स्वरूप ,, | शुद्ध गेरु का गुण ,, सौवीराञ्जन का स्वरूप ,, | शुद्ध गेरु की मात्रा ५६७