भारतकोश
रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary

सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा

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३२८ रसतरङ्गिणी प्लीहोदरं निहन्त्याशु चिरजञ्चातिदारुणम् ॥ १० ॥ शुक्तिकाक्षारसंयुक्तो विमलो नवसादरः । प्लीहानं नाशयेत्याशु यकृद्दोषं तथैव च ॥ ११ ॥ मरिचसैन्धवमिसियुक्तः शुद्धो नृसादरः । आध्मानाजीर्णशमनो भुक्तमांसादिजारणः ॥ १२ ॥ अनन्तमूलक्वथितनीरेण नवसादरः । निपीतो नियमादाशु यकृद्वृद्धिहरो मतः ॥ १३ ॥ मधुयष्टिवचाव्याघ्रीकषायेण नृसादरः । सेवितो ह्यचिरादेव कफविश्लेषणः परम् ॥ १४ ॥ यकृद्दोषसमुद्भूते जलोदरगदे भिषक् । अपामार्गकषायेण नरसारं प्रयोजयेत् ॥ १५ ॥ नृसारः काञ्जिकेनेह निपीतः स्वल्पमात्रया । रक्तस्रावं फुप्फुसोत्थं द्रुतमेव निरोधयेत् ॥ १६ ॥ नृसारं तोलकामतं दशतोलकसंमिते । जले संद्राव्य तद्द्वारा वस्त्रमार्द्रीकृतं ततः ॥ १७ ॥ व्रध्नशोथे निबध्नीयाज्ज्वरशूलादिसंयुते । दिनसप्तकमात्रेण व्रध्नशोथं निवारयेत् ॥ १८ ॥ यवक्षारयुतो नव्यसारो रक्तित्रयोन्मितः । शारिवाकथितैः पीतो व्रणमेहं निवारयेत् ॥ १६ ॥ आमयिकः प्रयोगः सुगमोऽनुभूतप्रायश्चेति ॥ ६–१६ ॥ आ.टी.—शुद्ध नौसादर को जीरा, सोंठ, मिर्च, पीपल के चूर्ण के साथ सात दिन तक प्रयोग करने से पाचक अग्नि की वृद्धि होती है। बढ़ी हुई पुरानी तिल्ली में नौसादर को हींग, सोंठ, मिर्च और पिप्पलीचूर्ण के साथ प्रयोग करने से लाभ होता है। यकृत् की विकृति और प्लीहा की वृद्धि में नौसादर का शुक्ति- भस्म के साथ सेवन कराने से शीघ्र लाभ होता है। कालीमिर्च, सैन्धानमक तथा सौंफ चूर्ण के साथ शुद्ध नौसादर का सेवन कराने से आध्मान (अफारा) अजीर्ण रोग में लाभ होता है। और मांस आदि गुरु भोजन शीघ्र पच जाते हैं। यकृत्‌वृद्धि रोग में नौसादर को अनन्तमूल के कषाय के साथ प्रयोग करने से लाभ होता है श्वाससंस्थान में कफ के जम जाने पर उसको पिघलाने या पतला कर निकालने में नौसादर को मुलेठी, वच, छोटी कटेलीकषाय के साथ