भारतकोश
रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary

सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा

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६४४ रसतरङ्गिणी और गोघृत के साथ सेवन करने से सब प्रकार के मदात्यय रोग नष्ट हो जाते हैं। लाजवर्द की भस्म में समभाग अभ्रकसत्त्वभस्म और कान्तलोहभस्म मिला- कर कुछ दिन निरन्तर शहद के साथ सेवन करने से भयंकर प्रमेहादि रोग नष्ट हो जाते हैं । । २०१-२०४ ॥ राजावर्तस्य सत्त्वपातनं मारणञ्च मनःशिलाज्यसंयुक्तं नृपोपलं विचूर्णितम् । पचेत्तु लोहभाजनेऽथ सैरिभीसुदुग्धतः ॥ २०५ ॥ समित्रपञ्चकस्ततो विमर्द्य गोलकीकृतः । सुतीक्ष्णखादिराग्निना विपाचितस्ततस्त्वयम् ॥ २०६ ॥ स्वकीयसत्त्वमुत्तमं विमुञ्चतीह सत्वरम् । ततः सलोङ्गन्धकं विपक्वेति पञ्चताम् ॥ २०७ ॥ राजावर्तस्य सत्त्वपातनं तन्मारणञ्चाह मनःशिलेति-सैरिभी महिषी । निगदव्याख्यातमन्यत् ॥ २०५-२०७ ॥ भा.टी.-राजावर्त के चूर्ण में समभाग शुद्ध मैनसिलचूर्ण और गोदुग्ध मिलाकर इसमें भैंस का दूध डाल दें और इन सबको एक लोहे के पात्र में अच्छी तरह पकाकर खुश्क कर लें। अब इसमें समभाग पूर्वोक्त मित्र पञ्चक द्रव्य मिलाकर अच्छी तरह घोटकर गोलियाँ बना लें। अब इन गोलियों को एक बड़ी-मूषा में रखकर तीव्र अग्नि में पकायें तो मूषा में इसका शीघ्र ही उत्तम सत्त्व निकल आता है। इस लाजवर्द सत्त्व में समभाग शुद्धगन्धक मिला बिजौरा नींबू के रस में घोटकर पुट में फूँक देने से लाजवर्द-सत्त्व की भस्म हो जाती है ॥ २०५-२०७ ॥ अथ पेरोजकस्य नामानि पेरोजश्च पेरोजं रसज्ञैः परिकीर्तितम् । भस्माङ्गं हरितं चेति द्विविधं तत् प्रकीर्तितम् ॥ २०८ ॥ भा.टी.-पेरोजक तथा पेरोज, ये दो नाम फिरोजा के कहे जाते हैं। फिरोजा के दो भेद माने जाते हैं। १-भस्मांग (राख जैसे रंग का), २-हरित (हरे रंग का) ॥ २०८ ॥ पेरोजकस्य शोधनमारणे शोधनं मारणञ्चैव पेरोजस्य विशेषतः । नृपोपलसमं ख्यातं रसत्तन्त्रविशारदैः ॥ २०६ ॥ पेरोजकपरिचयः-पेरोजकञ्च द्विविधं भस्माङ्गं हरितञ्च। तस्य शोधनमारणे