भारतकोश
रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary

गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा

DevanagariHindipublished584 पृष्ठ

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( १४६ ) रसेन्द्रसारसंग्रह । भस्म, पाठा, वायविडंग, नागरमोथा, सोंठ, सुगंधवाला, हरितालभस्म, अभ्रकभस्म और आमले यह सब औषधि समान भाग लेकर आकके पत्तोंके रसमें अच्छे प्रकारसे खरल करके दो दो रत्तीकी गोली बना लेवे । इन गोलियोंको अदरखके रसके साथ सेवन करनेसे सर्व प्रकारके ज्वर, विषम ज्वर, तथा द्वन्द्वज, भौतिक, कामादिजनित, अभिचारज ज्वर, शुक्रस्थज्वर और डाकिन्यादि आवेशजनित ज्वर तत्काल नष्ट होजाते हैं ॥ ८३-८५ ॥ सौभाग्यवटी । सौभाग्यामृतजीरपञ्चलवणव्योषाभयाक्षामला, निश्चन्द्राभ्रकशुद्धगन्धकरसानेकीकृतान्भावयेत् । निर्गुण्डीयुगभृंगराजकवृषापामार्गपत्रोल्लसत्, प्रत्येकं स्वरसेन सिद्धवटिका घ्नन्ति त्रिदोषोदयम्८६ येषां शीतमतीव देहमखिलं स्वेदद्रवार्द्रीकृतं, निद्रा घोरतरा समस्तकरणव्यामोहमूढं मनः । शूलं श्वासबलासकाससहितं मूर्च्छारुचिं तृड्ज्वरं, तेषां वैपरिहृत्य जीवितमसौ गृह्णाति मृत्योर्मुखात्८७ सुहागा, विष, जीरा, पांचों लवण, त्रिकुटा, हरड, बहेडा, आमला, अभ्रक भस्म, गंधक और पारा यह सब द्रव्य समान भाग लेकर सम्हालू, भांगरा, काला भांगरा, अडूसा और चिरचिटा इन सबके पत्तोंके रसमें अलग अलग खरल करके दो दो रत्तीकी गोली बना लेवे। यह गोली त्रिदोषजनित रोगोंको नष्ट करती है । जिन मनुष्योंके शरीरमें अतीव शीत व्याप्त हो गया हो तथा जिनका शरीर अत्यंत पसीनेसे भीज रहा हो, जो अतीव घोरतर निद्रासे विह्वल हो, जिनकी समस्त इन्द्रियें विकल और जिनका मन मुग्ध होगया हो उनको यह औषधि सेवन करनेसे शूल, श्वास, कफ, खाँसी, मूर्च्छा, अरुचि, तृषा और ज्वर नष्ट कर मृत्युके मुखसे भी बचा देती है ॥ ८६ ॥ ८७ ॥